क़रीब तीन साल पहले हमने दो हिन्दू लड़कियों को 'लव जेहाद' से बचाया था... ये लड़कियां आज बहुत सुखी हैं... और इनके माता-पिता हमें बहुत स्नेह करते हैं...
बात तीन साल पुरानी है...
हमारे शहर के दो मुस्लिम लड़के हैं, दोनों भाई हैं... उन्होंने पड़ौस की ही दो ब्राह्मण बहनों से 'प्रेम' (वास्तव में जो प्रेम हो ही नहीं सकता) की पींगे बढ़ानी शुरू कर दीं... दोनों लड़के अनपढ़ हैं, जबकि लड़कियां कॉलेज में पढ़ रही थीं...
वो लड़कियों को शोपिंग कराते, उन्हें बाइक पर घुमाते... ब्राह्मण परिवार में वो लड़के दिन-दिनभर रहते...
एक बार उनमें से एक लड़के ने किसी पुलिस वाले से मारपीट कर ली, उसे हिरासत में ले लिया गया... उसका भाई मदद के लिए हमारे पास आया... हमने एसपी से बात करके मामले रफ़ा-दफ़ा करवा दिया... साथ ही हिदायत भी दी कि फिर कभी ऐसी हरकत की तो हमारे पास मत आना...
उन भाइयों में से बड़ा भाई नमाज़ का बहुत पाबन्द है... वो 'जमात' में भी जाता है... जबकि 'छोटा भाई' तो शायद साल-छह महीने में ही मस्जिद का मुंह देखता है... 'बड़े भाई' ने हमारे भाइयों को भी 'सबक़' सिखाना शुरू किया... हमारे छोटे भाई ने एक दिन इस बात का ज़िक्र हमसे किया... हमने कहा कि उन 'भाइयों' से दूर ही रहना... कहीं मिले तो 'बड़े भाई' कहना हमने दफ़्तर बुलाया है... इस बात के दो दिन बाद 'बड़ा भाई' हमारे दफ़्तर आया... हमने उससे बहुत सी बातें पूछीं... मसलन जमात , जमात की शिक्षाओं और फिर वही, धर्मांतरण, जन्नत-दोज़क़, ताकि हा उसे बातों में लगाकर वो सब पूछ सकें... जो हम जानना चाहते हैं... हम उनसे पूछा- उन लड़कियों का क्या क़िस्सा है... ???
पहले तो उसने टाल-मटोल की, मगर जब हमने मदद का दिलासा दिलाया तो वो बताने को राज़ी हो गया...
उसने बताया कि वो छोटी वाली लड़की से प्रेम करता है... और उसका छोटा भाई बड़ी लड़की से...
हमने कहा- वो तो 'हिन्दू' हैं और तुम मुसलमान...क्या तुम्हारे घर वाले मान जाएंगे... ?
वो ख़ुश होकर बोला- क्यों नहीं आख़िर 'नेक' काम कर रहा हूं... इससे हमें सवाब मिलेगा...
हमने पूछा-नेक का...? वो कैसे...?
उसने कहा- वो लड़कियां काफ़िर हैं... हम उन्हें 'कलमा' पढ़ा लेंगे... इससे हमें दस हज का सवाब मिलेगा... और मरने के बाद जन्नत...जन्नत में 72 हूरें मिलेंगी, जन्नती शराब मिलेगी...
हमें पूछा- यह सब तुम्हें किसने सिखाया...?
वो कहने लगा- हमें जमात में यह सब बताया जाता है...
हमने कहा- एक बात बताओ... दस हज के सवाब के लिए दो लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद करना क्या जायज़ है...?
वो हैरान होकर हमारी तरफ़ देखने लगा और बोला- जिंदगी बर्बाद क्यों होगी...?
हमने कहा- वो लड़कियां पढ़ी-लिखी हैं और ज़ाहिर है, क़ाबिल और पढ़े-लिखे लड़कों से शादी करेंगी तो ख़ुशहाल ज़िन्दगी बसर करेंगी, जो तुम्हारे साथ मुमकिन नहीं...
तुम लोग हिन्दू लड़कियों से शादी करके उन्हें (अपने लालच के लिए) मुसलमान तो बना लोगे, लेकिन क्या कभी सोचा है, उन मुस्लिम लड़कियों का क्या होगा, जिनसे तुम्हारी शादी होती... वो कहां जाएंगी...???
जन्नती शराब के लिए दो मासूम लड़कियों की ज़िन्दगी तबाह करने से क्या यह बेहतर नहीं है कि तुम शराब पी लो...???
जन्नत में 72 हूरों के साथ अय्याशी को क्या कहा जाएगा...??? पुण्य का फल...???
ख़ैर... हम जानते थे, यह लड़कों को बचपन से ही घुट्टी की तरह पिलाई जाती हैं, ऐसे लोग फिर कहां किसी की बात मानते हैं...
ऐसी मानसिकता के लोगों के करम में भी अय्याशी (दुनिया में चार-चार औरतों के साथ) और फल में भी अय्याशी (जन्नत में 72 हूरों के साथ) कूट-कूटकर भरी होती हैं...
हमने उसे विदा किया... बाद में हमने अपनी अम्मी से इस बारे में बात की... उन्होंने कहा कि लड़कियों की मां और और वो लड़कियां तुम्हें बहुत मानती हैं... उनसे बात कर लो... बहन-बेटियां सबकी सांझी होती हैं... (हमें अपनी अम्मी की यह बात बहुत अच्छी लगी...)
काश! सभी ऐसा ही सोच सकते...
अगले दिन इतवार था... हम लड़कियों के घर गए और उन्हें सभी बातें अच्छी तरह से समझा दीं... उनके सामने पूरी ख़ुशहाल ज़िन्दगी पड़ी है... ऐसे लड़कों के साथ क्यों ज़िन्दगी ख़राब कर रही हैं...
काश! सभी ऐसा ही सोच सकते...
अगले दिन इतवार था... हम लड़कियों के घर गए और उन्हें सभी बातें अच्छी तरह से समझा दीं... उनके सामने पूरी ख़ुशहाल ज़िन्दगी पड़ी है... ऐसे लड़कों के साथ क्यों ज़िन्दगी ख़राब कर रही हैं...
कुछ माह बाद पता चला कि चंडीगढ़ में उन लड़कियों की शादी हो गई और वे बहुत सुखी हैं... वो लड़कियां अपने मायके आई हुई हैं... कल घर भी आईं थीं... उन्होंने हमसे कहा... दीदी हम आपको अपना मार्गदर्शक मानती हैं... आप हमें न समझातीं तो आज पता नहीं हम कहां और किस हाल में होतीं...!!!
हमें उनसे मिलकर बहुत ख़ुशी हुई...
ईश्वर उन्हें हमेशा सुखी रखे... यही कामना है...
जन्नत की हक़ीक़त क्या है...???
इस दुनिया में मर्दों के लिए चार औरतों का इंतज़ाम तो है ही, साथ ही जन्नत में भी 72 हूरें और पीने के लिए जन्नती शराब मिलेगी...यानि अय्याशी का पूरा इंतज़ाम...
जैसे जन्नत न हुई अय्याशी का अड्डा हो गया...
इस लेख में हमने सिर्फ़ उसी का ज़िक्र किया है... जो हो रहा है... और इसे 'कुतर्कों' से झुठलाया नहीं जा सकता...
@Shah Nawaz
जमात में हमारे बहुत से रिश्तेदार जाते हैं...
वहां लोगों नमाज़ सिखाई जाती, जिन्हें नहीं आती... इस्लाम की बुनियादी बातें सिखाई जाती हैं...
ज़ाहिर है बहुत-सी अच्छी बातें सिखाई जाती हैं...
लेकिन इनमें चार निकाह और 72 हूरों वाली बातें भी बताई जाती हैं...
हम प्रेम विवाह को बुरा नहीं मानते... (मगर ज़रूरी है... कि वो 'प्रेम' ही हो... उसके पीछे कोई साज़िश न हो...अगर वो लड़के उन लड़कियों से सचमुच 'प्रेम' करते और उन लड़कियों के क़ाबिल होते और लड़कियों के धर्म परिवर्तन की बात न करते तो बेशक उनकी शादी के लिए हम उनकी मदद करते... प्रेम के मामले में हिन्दू लड़कियां ही मुसलमान क्यों बनें, प्रेम की ख़ातिर लड़के भी तो लड़कियों के मज़हब का सम्मान कर सकते हैं...)
हमारा मानना है, जिस 'प्रेम' में त्याग की भावना न हो, वो 'प्रेम' हो ही नहीं सकता...
अकसर (सभी के बारे में दावा नहीं ) लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए इस्लाम कुबूल करते हैं...यानि कानूनी झमेलों से बचने के लिए...जिसकी ताज़ा मिसाल हैं...हरियाणा के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री चन्द्रमोहन बिश्नोई उर्फ़ चांद मुहम्मद और अनुराधा बाली उर्फ़ फ़िज़ा...जिन्होंने विवाह करने के लिए इस्लाम अपनाया...दिल्ली के प्रेस क्लब में दोनों ने दावा किया कि उन्होंने विवाह के लिए नहीं, बल्कि इस्लामी शिक्षाओं में आस्था रखते हुए इस्लाम कुबूल किया है...यह तो सभी जानते थे कि उनकी किस 'शिक्षा' में आस्था थी...ख़ैर, हुआ भी वही, बाद में चांद मुहम्मद बिश्नोईयों के पवित्र धाम मुक़ाम में जाकर वापस चन्द्रमोहन बिश्नोई बन गए और फ़िज़ा द्वारा चंडी मंदिर में विशेष पूजा करवाने का मामला भी सामने आया...अगर चन्द्रमोहन बिश्नोई ने इस्लामी शिक्षाओं से प्रभावित होकर इस्लाम क़ुबूल किया था तो इतनी जल्दी इस्लामी शिक्षाओं से क्यों उनका मोह भंग हो गया...?
@Saleem
'प्रेम' और 'लव जेहाद' दो अलग-अलग बातें हैं...
शाहरुख खान बाकायदा अपनी पत्नी गौरी के साथ देवी-देवताओं की पूजा करते हैं...
अगर शाहरुख खान गौरी को इस बात के लिए मजबूर करें कि वो अपने देवी-देवताओं की पूजा छोड़कर सिर्फ़ नमाज़ ही पढ़े, तो बेशक इसे भी 'लव जेहाद' ही कहा जाएगा...
@प्रवीण शाह
क्या किसी मुद्दे कि तरफ़ ध्यान दिलाना पूरे समाज को कठघरे में खड़ा करना होता है...?
दोनों लड़के हमारी नज़र में तो 'अनपढ़' सकते हैं, लेकिन हर किसी की नहीं, क्योंकि वो 'क़ुरआन' पढ़ते हैं, जमात में जाते हैं... और दूसरों को भी 'सबक़' पढ़ाते हैं, जैसा उन्होंने हमारे भाइयों के साथ किया...
चलो मान लेते हैं, वो 'अनपढ़' हैं,... लेकिन उन पढ़े-लिखे लोगों को आप क्या कहेंगे, जो औरत को 'लावारिस गोश्त' बताते हैं...
कोई भी औरत हर वक़्त तो बुर्क़ा पहनकर सकती (बुर्क़े वाली ही सही)... क्या ये लोग अपनी बहन-बेटियों पर भी आवारा कुत्तों की तरह टूट पड़ेंगे...???
अपनी बहुओं पर तो कुछ लोग आवारा कुत्तों की तरह टूट पड़ें हैं... यह जगज़ाहिर है...बार-बार बताने की ज़रूरत नहीं...
@बैरागी
आपका सवाल जायज़ है, लेकिन आप इसे सम्मानजनक तरीक़े से रख सकते थे... (हम आपसे तो ऐसी उम्मीद कर ही सकते हैं...)जन्नत की हक़ीक़त क्या है...???
इस दुनिया में मर्दों के लिए चार औरतों का इंतज़ाम तो है ही, साथ ही जन्नत में भी 72 हूरें और पीने के लिए जन्नती शराब मिलेगी...यानि अय्याशी का पूरा इंतज़ाम...
जैसे जन्नत न हुई अय्याशी का अड्डा हो गया...
इस लेख में हमने सिर्फ़ उसी का ज़िक्र किया है... जो हो रहा है... और इसे 'कुतर्कों' से झुठलाया नहीं जा सकता...
ज़रूरी बात : कुछ 'मुस्लिम ब्लोगर भाई' हमारे ब्लॉग पर 'असभ्य' भाषा में टिप्पणियां लिखकर अपने 'संस्कारों' का प्रदर्शन कर रहे हैं... ऐसे लोगों से हमारा विन्रम निवेदन है कि वो यहां न आएं... यह 'सभ्य' लोगों के लिए है...
@Shah Nawaz
जमात में हमारे बहुत से रिश्तेदार जाते हैं...
वहां लोगों नमाज़ सिखाई जाती, जिन्हें नहीं आती... इस्लाम की बुनियादी बातें सिखाई जाती हैं...
ज़ाहिर है बहुत-सी अच्छी बातें सिखाई जाती हैं...
लेकिन इनमें चार निकाह और 72 हूरों वाली बातें भी बताई जाती हैं...
हम प्रेम विवाह को बुरा नहीं मानते... (मगर ज़रूरी है... कि वो 'प्रेम' ही हो... उसके पीछे कोई साज़िश न हो...अगर वो लड़के उन लड़कियों से सचमुच 'प्रेम' करते और उन लड़कियों के क़ाबिल होते और लड़कियों के धर्म परिवर्तन की बात न करते तो बेशक उनकी शादी के लिए हम उनकी मदद करते... प्रेम के मामले में हिन्दू लड़कियां ही मुसलमान क्यों बनें, प्रेम की ख़ातिर लड़के भी तो लड़कियों के मज़हब का सम्मान कर सकते हैं...)
हमारा मानना है, जिस 'प्रेम' में त्याग की भावना न हो, वो 'प्रेम' हो ही नहीं सकता...
अकसर (सभी के बारे में दावा नहीं ) लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए इस्लाम कुबूल करते हैं...यानि कानूनी झमेलों से बचने के लिए...जिसकी ताज़ा मिसाल हैं...हरियाणा के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री चन्द्रमोहन बिश्नोई उर्फ़ चांद मुहम्मद और अनुराधा बाली उर्फ़ फ़िज़ा...जिन्होंने विवाह करने के लिए इस्लाम अपनाया...दिल्ली के प्रेस क्लब में दोनों ने दावा किया कि उन्होंने विवाह के लिए नहीं, बल्कि इस्लामी शिक्षाओं में आस्था रखते हुए इस्लाम कुबूल किया है...यह तो सभी जानते थे कि उनकी किस 'शिक्षा' में आस्था थी...ख़ैर, हुआ भी वही, बाद में चांद मुहम्मद बिश्नोईयों के पवित्र धाम मुक़ाम में जाकर वापस चन्द्रमोहन बिश्नोई बन गए और फ़िज़ा द्वारा चंडी मंदिर में विशेष पूजा करवाने का मामला भी सामने आया...अगर चन्द्रमोहन बिश्नोई ने इस्लामी शिक्षाओं से प्रभावित होकर इस्लाम क़ुबूल किया था तो इतनी जल्दी इस्लामी शिक्षाओं से क्यों उनका मोह भंग हो गया...?
@Saleem
'प्रेम' और 'लव जेहाद' दो अलग-अलग बातें हैं...
शाहरुख खान बाकायदा अपनी पत्नी गौरी के साथ देवी-देवताओं की पूजा करते हैं...
अगर शाहरुख खान गौरी को इस बात के लिए मजबूर करें कि वो अपने देवी-देवताओं की पूजा छोड़कर सिर्फ़ नमाज़ ही पढ़े, तो बेशक इसे भी 'लव जेहाद' ही कहा जाएगा...
@प्रवीण शाह
क्या किसी मुद्दे कि तरफ़ ध्यान दिलाना पूरे समाज को कठघरे में खड़ा करना होता है...?
दोनों लड़के हमारी नज़र में तो 'अनपढ़' सकते हैं, लेकिन हर किसी की नहीं, क्योंकि वो 'क़ुरआन' पढ़ते हैं, जमात में जाते हैं... और दूसरों को भी 'सबक़' पढ़ाते हैं, जैसा उन्होंने हमारे भाइयों के साथ किया...
चलो मान लेते हैं, वो 'अनपढ़' हैं,... लेकिन उन पढ़े-लिखे लोगों को आप क्या कहेंगे, जो औरत को 'लावारिस गोश्त' बताते हैं...
कोई भी औरत हर वक़्त तो बुर्क़ा पहनकर सकती (बुर्क़े वाली ही सही)... क्या ये लोग अपनी बहन-बेटियों पर भी आवारा कुत्तों की तरह टूट पड़ेंगे...???
अपनी बहुओं पर तो कुछ लोग आवारा कुत्तों की तरह टूट पड़ें हैं... यह जगज़ाहिर है...बार-बार बताने की ज़रूरत नहीं...
@बैरागी
आपसे विन्रम अनुरोध है कि हमारी शिकायत दर्ज करें...
औरतों को जब इस दुनिया में ही 'इंसान' तक नहीं समझा जाता तो फिर जन्नत का सवाल ही बेमानी है... क्योंकि वहां भी तो वही 'क़ानून' लागू होगा, जो यहां है... यानी पुरुष पक्षीय...





58 Comments:
आप ने लव जेहाद को बाकायदा परिभाषित कर दिया है और उस का मूल भी स्पष्ट कर दिया है। इस तरह की मानसिकता की समाप्ति के लिए जबर्दस्त सामाजिक अभियान की आवश्यकता है जिस में लड़कियों को शिक्षित करना एक आवश्यक अंग है।
हिन्दू-मुस्लिम और मुस्लिम-हिन्दू शादी तो स्वागत योग्य है पर इसके मकसद अगर नेक नहीं है तो फिर यही जलील हरकत है.
आपका कदम सराहनीय है.
72 हूरों के लिये तो हर्गिज नहीं
बहुत सुन्दर फिरदौस बहन , जैसा की मैंने कहीं पर टिपण्णी में कहा की अगर सारे लोग ( हिन्दू और मुस्लिम ) फिरदौस की मानसिकता वाले हो जाए तो फिर झगडा या आपसी मनमुटाव की वजह ही क्या रह जायेगी दो समुदायों के बीच में ?
मन को झकझोरने जैसा रहा यहाँ आकर पढना!एक इंसान को क्या होना चाहिए और और वो क्या हो हो सकता है,कहा तक गिर सकता है,दोनों उदाहरण यहाँ है!इंसानियत भी कुछ चीज़ है धरती पर,समझो यार!
कुंवर जी,
जमात में तो यह बताया गया होगा की गैर मुस्लिम को मुसलमान बनाने में दस हज का सवाब मिलता है, लेकिन उन जाहिल लड़कों की मानसिकता ने कुछ का कुछ समझ लिया की चलो लड़कियों से लव करके यह काम करो यानी दीन भी सुधरा और दुनिया भी. खैर आपने दो नहीं बल्कि चार जिंदगियां बर्बाद होने से बचा लीं.
फिरदौस बहन, आप जो उस लड़के के बारे में बता रही है, कि उसने कहा कि जमात में यह बताया जाता है, ज़रा आप मेरे साथ निजामुद्दीन मरकज़ और वहां के अकाबिरीन चलकर देखिये. आपको पता चल जाएगा कि वहा क्या शिक्षा मिलती है? पूरी दुनिया में ऐसी शांति और भाईचारे की शिक्षा कहीं और नहीं मिलती होगी. स्वयं मुस्लिम कट्टर पंथी उनका यह कहकर विरोध करते हैं, कि वह हमेशा प्यार-भाई चारे की बात करते हैं, परन्तु जिहाद की बात नहीं करते. जबकि उनका मानना है कि जिहाद का मतलब ज़िन्दगी में अच्छे कामो के लिए जद्दोजहद. अपने जीवन को मुहम्मद (स.) की तरह प्रेम से सरोबार करने की कोशिश. मैंने जो प्रेम सीखा है, वह अपनी व्यस्तता की बीच उन्ही लोगो के संनिद्धय से सीखा है.
आपको भी दावत दे रहा हूँ, एक बार स्वयं चलकर तो देखिये. आप स्वयं उनसे इस बारे में सलाह भी कर सकती हैं.
मैं स्वयं अपने परिवार की इस तरह की शादी के लिए उनके पास जा चूका हूँ. हम परेशान थी क्योंकि हमारे मोहल्ले के लोग (जो कि मुस्लिम ही हैं) बहुत उल्टा सीधा कह रहे थे, जिसकी वजह से मेरे माँ-बाप बहुत ज्यादाह परेशान थे.
परन्तु वहां के अकाबिरीन ने मुझे यह कहकर वापिस कर दिया था, कि ऐसी शादी सिर्फ दुनियावी प्रेम और दिखावा है. कोई भी इंसान सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम के चलते तो धर्म परिवर्तन कर सकता है, परन्तु ऐसे धर्म परिवर्तन करना सिर्फ लोगो को बेवक़ूफ़ बनाना है.
आपकी हर पोस्ट आपकी निडरता और निष्पक्षता को जहीर करती है.
मेरे एक सवाल का जवाब दीजियेगा, क्या शाहरुख़ ख़ान ने एक हिन्दू लड़की से शादी की है तो क्या वह भी 'लव जिहादी' है; अगर कोई मुस्लिम लड़का किसी हिन्दू लड़की से शादी करता है तो वह जिहादी (हालाँकि का जिहाद का अर्थ कहीं भी वह नहीं जो आपके दिमाग में भरा जा रहा है)........... मगर जब कोई हिन्दू मुस्लिम लड़की से शादी करता है आप उसे क्या कहेंगी???????????????????????????????? जवाब ज़रूर दीजियेगा...
बहन फ़िरदौस, क्यूँ-कर अपने ही बेसिक सिद्धांतों के ख़िलाफ़ जा रहे हैं आप !! अव्वलन यह तो मिडिया क्रियेशन है; एक ख़ास तबके की साजिश है और आप हैं कि अपने क़ीमती लेखनी की स्याही को उनके विचारों से 'स्याह' करने पर आमादा हैं. पता है आपको "वो कहते हैं और कहते ही जाते हैं, बिना सच्चाई के; और हम उस पर यकीन कर लेते हैं बिना किसी दलील के"
फ़िरदौस जी, यहाँ मैं कुछ नहीं कहूंगा।
मुझे जो कहना था पहले ही "सड़ान्ध गैंग" के ब्लॉगों पर जाकर कह चुका हूं… एक भी सवाल का सीधा जवाब अब तक नहीं मिला…
@Shah Nawaz
जमात में हमारे बहुत से रिश्तेदार जाते हैं...
वहां लोगों नमाज़ सिखाई जाती, जिन्हें नहीं आती... इस्लाम की बुनियादी बातें सिखाई जाती हैं...
ज़ाहिर है बहुत-सी अच्छी बातें सिखाई जाती हैं...
लेकिन इनमें चार निकाह और 72 हूरों वाली बातें भी बताई जाती हैं...
हम प्रेम विवाह को बुरा नहीं मानते... (मगर ज़रूरी है... कि वो 'प्रेम' ही हो... उसके पीछे कोई साज़िश न हो...
अगर वो लड़के उन लड़कियों से सचमुच 'प्रेम' करते और उन लड़कियों के क़ाबिल होते और लड़कियों के धर्म परिवर्तन की बात न करते तो बेशक उनकी शादी के लिए हम उनकी मदद करते... प्रेम के मामले में हिन्दू लड़कियां ही मुसलमान क्यों बनें, प्रेम की ख़ातिर लड़के भी तो लड्क्यों के मज़हब का सम्मान कर सकते हैं...)
हमारा मानना है, जिस 'प्रेम' में त्याग की भावना न हो, वो 'प्रेम' हो ही नहीं सकता...
अकसर (सभी के बारे में दावा नहीं ) लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए इस्लाम कुबूल करते हैं...यानि कानूनी झमेलों से बचने के लिए...जिसकी ताज़ा मिसाल हैं...हरियाणा के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री चन्द्रमोहन बिश्नोई उर्फ़ चांद मुहम्मद और अनुराधा बाली उर्फ़ फ़िज़ा...जिन्होंने विवाह करने के लिए इस्लाम अपनाया...दिल्ली के प्रेस क्लब में दोनों ने दावा किया कि उन्होंने विवाह के लिए नहीं, बल्कि इस्लामी शिक्षाओं में आस्था रखते हुए इस्लाम कुबूल किया है...यह तो सभी जानते थे कि उनकी किस 'शिक्षा' में आस्था थी...ख़ैर, हुआ भी वही, बाद में चांद मुहम्मद बिश्नोईयों के पवित्र धाम मुक़ाम में जाकर वापस चन्द्रमोहन बिश्नोई बन गए और फ़िज़ा द्वारा चंडी मंदिर में विशेष पूजा करवाने का मामला भी सामने आया...अगर चन्द्रमोहन बिश्नोई ने इस्लामी शिक्षाओं से प्रभावित होकर इस्लाम क़ुबूल किया था तो इतनी जल्दी इस्लामी शिक्षाओं से क्यों उनका मोह भंग हो गया...?
अवधिया जी के कथन को मेरी बात मानी जाए..."हिन्दू-मुस्लिम और मुस्लिम-हिन्दू शादी तो स्वागत योग्य है पर इसके मकसद अगर नेक नहीं है तो फिर यही जलील हरकत है."
रही बात जमात में ज्ञान देने की, ज्यादातर लोग अच्छा ज्ञान बांचते हैं. मगर वो कहते हैं न बुराई तेजी से फैलती है. मैं बचपन में मुस्लिम हॉस्टल में रहा हूँ... मुझे लगभग सारे कलमे याद थे... अभी भी दो तीन याद हैं....रात को सोने से पहले क्या पढ़ते हैं... वगैरह वगैरह! इसका मतलब सिर्फ इतना है मेरा कोई दुश्मन नहीं. सब देशवासी हैं. उनके साथ साथ चलना है. एक दुसरे को इज्ज़त देना है... एक दुसरे की अच्छाइयों को सीखना सिखाना है... अपने अन्दर छुपी बुराइयों को (चाहे वे कहीं से आये हों, जमात से या मठ से) त्यागना है...मेरा प्रिय दोस्त भी एक मुस्लिम ही है... मुझ पर जान छिड़कता है... मेरे लिए कभी नफा नुक्सान नहीं सोचता...न मैं उसके लिए सोचता हूँ... मुझे प्रेमपूर्ण वातावरण चाहिए सबको इसी की जरुरत होती है. धर्मान्धता, झूठ, मक्कारी, जहालत से किसी का भला नहीं हो सकता... आपने सही राह दिखाया है... यह स्वागत योग्य है...
@ जीशान जैदी… आपने स्वीकार किया कि… "…जमात में तो यह बताया गया होगा की गैर-मुस्लिम को मुसलमान बनाने में दस हज का सवाब मिलता है…"
यह बात "बहुत कुछ" बयान करती है… (मंसूबे भी, नीयत भी…)
हमने तो किसी वेद या ग्रन्थ में नहीं पढ़ा कि गैर-हिन्दुओं को हिन्दू बनाओ तो कैलाश मानसरोवर का पुण्य मिलेगा… और ऐसा शायद इसलिये होगा कि वेद-पुराण बहुत-बहुत-बहुत पहले इस धरती पर आये, बाकी के सब तो अभी-अभी 1500-2000 वर्ष पहले ही आये हैं…
और मजे की बात यह कि (भारत सरकार के जनसंख्या आँकड़ों के मुताबिक) भारत में पिछले 25 वर्ष से लगातार सबसे अधिक जन्म दर होने के बावजूद, दस मुसलमान और बनाने की जिद??? इसे कमाल नहीं बल्कि Disgusting Attitude कहते हैं।
@ सलीम - आपने कहा : "…अव्वलन यह तो मिडिया क्रियेशन है; एक ख़ास तबके की साजिश है…" यानी केरल और कर्नाटक दोनों हाईकोर्ट के जज मूर्ख हैं और आप उनसे अधिक समझदार हैं?
बुराई चाहे कहीं हो उसका विरोध होना ही चाहिए तभी वह समाज स्वस्थ और सुन्दर दिखेगा ! बहुत बढ़िया घटना बताई आपने इससे बहुत लोगों को सबक मिलेगा ! शुभकामनाएं !
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आदरणीय फिरदौस जी,
जिस वाकये के बारे में आपने लिखा है वह आपके सामने घटित हुई एक सत्य घटना है अत: उस पर कोई बहस यहाँ पर गलत होगी, परंतु उस के दोनों किरदार क्योंकि अनपढ़ हैं अत: अपने धर्म की सही व्याख्या करने में अक्षम भी... उन अनपढ़ों के किये पर एक पूरे समुदाय पर ही सवाल उठा देना जायज नहीं...
"साधु ऐसा चाहिये, जैसे सूप सुभाय
सार सार को गहि रहै, थोथा देय उड़ाय"
तो 'थोथे' को महत्व या प्रचार देना उचित नहीं,
रही बात धर्म परिवर्तन की, हम सब जिस धर्म के माता-पिता के घर पैदा हुऐ हैं वही हमारा धर्म होता है, अधिकाँश मामलों में... क्योंकि इसमें हमारा कोई बस नहीं कि हम किस घर पैदा हों... तो किसी को भी अपने धर्म का अभिमान भी नहीं होना चाहिये... अगर बड़े दिमाग और खुली आंखों से देखें तो 'धर्म' एक ऐसा विचार है जिसकी विदाई का समय आ गया है... वर्तमान कट्टरपंथिता 'धर्म' नामक इस बुझते दिये की लौ की बुझने से ठीक पहले की फड़फड़ाहट है... अत: क्यों न हम अपने असली जीवन ध्येय की ओर चलें... यानी अपनी आगे की नसलों के लिये एक बेहतर दुनिया बनाने की ओर... पीछे छोड़ कर इन 'ईश्वर व धर्म' संबंधी आउटडेटेड विचारों को !
्फिरदौस जी-आप एक सच्ची भारतीय हैं और सच्ची मुसलमान भी हैं. आपको नमन..
बहुत से चिट्ठासाथियों ने आपके लिखे के कारण लव जिहाद की बात को माना है. अब तक यह 'हिन्दू कट्टरपंथियों' का सगुफा था. आभार आपका. कोई लड़्की सुखी रहे यही कामना है, मगर 72 लड़्कियों के लालच में एक की जिन्दगी से खेलना स्वीकार नहीं किया जा सकता.
@ फ़िरदौस ख़ान
मेरे खयाल से आप की बात सलीम खान या तो उसके जैसो को समझ नही आयेगी क्यूं की उनकी सोच ज़ाकिर नाईक जैसी है जो कहते है की बिना बुर्के वाली औरत या तो ठीक से जिनका ताण ढाका नही है वो लावरीस गोश्त की तरह है जिणकार गली के कुत्ते नोचेंगे ही लेकिन मर्द को खुद पर संयम राखणे को नही कहते
और सबसे शर्मनाक बात याही है की उनका नाजरिया जो की औरत को लावरीस गोश्त समझते है या तो या उस्की उपमा देते है
@ फ़िरदौस ख़ान
मेरे खयाल से आप की बात सलीम खान या तो उसके जैसो को समझ नही आयेगी क्यूं की उनकी सोच ज़ाकिर नाईक जैसी है जो कहते है की बिना बुर्के वाली औरत या तो ठीक से जिनका ताण ढाका नही है वो लावरीस गोश्त की तरह है जिणकार गली के कुत्ते नोचेंगे ही लेकिन मर्द को खुद पर संयम राखणे को नही कहते
और सबसे शर्मनाक बात याही है की उनका नाजरिया जो की औरत को लावरीस गोश्त समझते है या तो या उस्की उपमा देते है
आदरणीय प्रवीण शा जी,
लगता है आपकी भी हर जगह टांग फसाने की बुरी आदत है ! आप मुझे बताएँगे कि कहाँ पर बहन फिरदौस ने पूरे समुदाय को ही दोषी करार दिया है ? बात सिर्फ लव जेहाद और उसके पीछे की घटिया सोच की हो रही है, किसी पूरे समुदाय पर उंगली उठाने के नहीं ! आप यह कहना चाहते है कि जो साजिस रची जा रही है, उसके खिलाफ हम आवाज न उठाये , लोगो को आगाह न करे ? अरे जनाव, सिर्फ दिखावे के लिए ही इतने भी भले मत बनिए कि कल यही सब आपके परिवार को भी झेलना पड़ जाए !Just एक कल्पना करो कि (भगवान् न करे ) आपकी लड़की को कोई ऐसे ही जाल में फंसा ले और फिर चार-पांच साल बाद उसे बर्वाद कर तलाक देदे, अब ये मत कहिएगा कि मैंने अपने बच्चो को अच्छे संस्कार दे रखे है वे ऐंसा नहीं करेंगे, जनाव, जवानी अंधी होती है ये याद रखे ! तो यहाँ सिर्फ उस खतरे के प्रति आगाह किया जा रहा है और कुछ नहीं !
@Saleem
'प्रेम' और 'लव जेहाद' दो अलग-अलग बातें हैं...
शाहरुख खान बाकायदा अपनी पत्नी गौरी के साथ देवी-देवताओं की पूजा करते हैं...
अगर शाहरुख खान गौरी को इस बात के लिए मजबूर करें कि वो अपने देवी-देवताओं की पूजा छोड़कर सिर्फ़ नमाज़ ही पढ़े, तो बेशक इसे भी 'लव जेहाद' ही कहा जाएगा...
@प्रवीण शाह
क्या किसी मुद्दे कि तरफ़ ध्यान दिलाना पूरे समाज को कठघरे में खड़ा करना होता है...?
दोनों लड़के हमारी नज़र में तो 'अनपढ़' सकते हैं, लेकिन हर किसी की नहीं, क्योंकि वो 'क़ुरआन' पढ़ते हैं, जमात में जाते हैं... और दूसरों को भी 'सबक़' पढ़ाते हैं, जैसा उन्होंने हमारे भाइयों के साथ किया...
चलो मान लेते हैं, वो 'अनपढ़' हैं,... लेकिन उन पढ़े-लिखे लोगों को आप क्या कहेंगे, जो औरत को लावारिस गोश्त बताते हैं...
कोई भी औरत हर वक़्त तो बुर्क़ा पहनकर सकती (बुर्के वाली ही सही)... क्या ये लोग अपनी बहन-बेटियों पर भी आवारा कुत्तों की तरह टूट पड़ेंगे...???
अपनी बहुओं पर तो कुछ लोग आवारा कुत्तों की तरह टूट पड़ें हैं... यह जगज़ाहिर है...बार-बार बताने की ज़रूरत नहीं...
बहन-बेटियां सबकी सांझी होती हैं...बहुत खूब
@Suresh Chiplunkar
"…जमात में तो यह बताया गया होगा की गैर-मुस्लिम को मुसलमान बनाने में दस हज का सवाब मिलता है…"...यह बात "बहुत कुछ" बयान करती है… (मंसूबे भी, नीयत भी…)
सुरेश जी अगर हमारे पास कोई अच्छी चीज़ है और हमारी नीयत यह हो की वह सबके पास हो जाए तो इसमें बुराई क्या है? हर व्यक्ति अपने मज़हब को श्रेष्ठ समझता है और चाहता है की दूसरा भी उसका मज़हब कुबूल कर ले तो उसके इस चाहने में क्या कोई बुराई है? हाँ बुराई तब है जब वह किसी लालच के द्वारा या फिर जोर ज़बरदस्ती यह करने की कोशिश करे. इसलिए मुसलमानों की कोई जमात आपके कथित लव जिहाद का कोई कांसेप्ट नहीं देती. हाँ उनकी किसी बात का कोई जाहिल गलत मतलब निकाल ले तो वह अलग बात है.
यहाँ तो पढ़े लिखे भी गलत मतलब निकाल सकते हैं.
'एक्स ने कहा की एक अच्छी माँ देश की तरक्की के लिए अच्छे लीडर बनाए (अपने बच्चों की अच्छी परवरिश करके)
'वाई ने कहा की एक्स कह रहा था की माँ घर में बैठकर अच्छे लीडर पैदा करे'
'जेड ने सुना की एक्स ने कहा की औरते घर में बैठकर केवल बच्चे पैदा करें.'
'ए ने निष्कर्ष निकाला की एक्स के अनुसार औरतें बच्चे पैदा करने की मशीन हैं.'
लीजिये हो गया कबाड़ा. जब पढ़े लिखों का यह हाल है तो जाहिलों की बात ही छोड़िये.
सादर नमस्कार!
लेखनी में ही वो ताकत है जो रुढियों को तोड़कर समाज का सही आईना दिखाती है!
मै प्रथम बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ, और यकीन मानिये मुझे कही नहीं लगता कि आपने कुछ भी गलत लिखा हो, आपकी बेबाक प्रस्तुति निश्चित ही एक मिसाल होगी.
इस ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए आभार !
रत्नेश त्रिपाठी
लेख बहुत अच्छा है आपको धन्यवाद
मेरा १ सवाल है जन्नत में ये बात तो बताई जाती है कि काफिरो की लड़कियों को कलमा पढाने से और उन्हें इस्लाम कबूल करवाने से "मरने के बाद जन्नत...जन्नत में 72 हूरें मिलेंगी"
ये सुविधाएँ ?? तो मर्दों को मिलेगी
पर जो औरत काफिरो के लडको को कलमा पढ़वायेंगे और इस्लाम कबूल करवाएंगे या करवाते है उन्हें क्या मिलेगा ???
क्या उन्हें भी ७२ मुस्टंडे मिलेंगे ????
अगर किसी इस्लामी विद्वान के पास जवाब हो तो कृपया जवाब दे
@बैरागी
आपका सवाल जायज़ है, लेकिन आप इसे सम्मानजनक तरीक़े से रख सकते थे... (हम आपसे तो ऐसी उम्मीद कर ही सकते हैं...)
आपसे विन्रम अनुरोध है कि हमारी शिकायत दर्ज करें...
औरतों को जब इस दुनिया में ही 'इंसान' तक नहीं समझा जाता तो फिर जन्नत का सवाल ही बेमानी है... क्योंकि वहां भी तो वही 'क़ानून' लागू होगा, जो यहां है... यानी पुरुष पक्षीय...
मैं गर्व से कह सकता हूँ की आप एक सच्ची भारतीय मुसलमान हैं। लेकिन सलीम साहेब और जीशान जी को भी गर्व से कह सकता हूँ की यो लोग सच्चे तालिबानी सोच वाले व्यक्ति हैं।
और अगर जमात मैं येही सिखाया जाता है तो मैं तो कहूँगा की जमात एक आंतकवादी पाठशाला है।
जमात में तो यह बताया गया होगा की गैर-मुस्लिम को मुसलमान बनाने में दस हज का सवाब मिलता है…"...यह बात "बहुत कुछ" बयान करती है… (मंसूबे भी, नीयत भी…)
Firdaus ji namashkar.
bahut hi accha lekh hai aur ek jordar tamacha hai talibani soch rakhne walo ke liye.
@Firdaus Khan
इस्लामी कानून पूरी तरह औरत मर्द के लिए बैलेंसिंग हैं. कुरआन की यह आयत पढ़िए,
(और ख़िदमत के लिए) नौजवान लड़के (गिल्मान) उनके आस पास चक्कर लगाया करेंगे वह (हुस्न व जमाल में) गोया एहतियात से रखे हुए मोती हैं. ( कुरआन : 52:24)
अमूमन शादी ब्याह जिंदगी भर के रिश्ते होते हैं| शायद ही कोई अपनी ज़िंदगी में तलाक चाहता है | सब चाहते हैं कि आने वाली ज़िंदगी में खुशियों का दामन भरा रहे| कोई भी रिश्ता जिसकी बुनियाद स्वार्थ पर हो, नहीं टिकता| साथ ही, बेमेल विवाह भी लंबे समय तक नहीं टिकते|
प्रेम शब्द बहुत व्यापक है| उसके लिए इंसान को बहुत कुर्बानियाँ देने के लिए तैयार होना पड़ता है, लेकिन इसमें जब कोई धोखा देता है, तो दिल से बददुयाएँ निकलती हैं| उन बद दुआओं के सामने जन्नत या स्वर्ग की परियाँ नहीं टिक सकती|
सबसे बड़ी बात है कि आप ईमानदार रहें|
एक बार फिर से, एक लाजवाब प्रस्तुति के लिए आपको धन्यवाद|
Firdosh bazi
jarkhand me rahte hue maine bhi kai baar yahan ke muslimon se suna hay ki agar kisi hindu ladki se shadi kar liya jaaye to jannati ho jayenge...ye logic mujhe bahut dinon se pareshan karti aayi hay..mujhe ek baat samjh me nahi aata ki apne kuchh muslim bhai ISLAM ka mazaq udane par kayon tule hue hayn..Apne iman ki parwah unhen bilkul nahi rahti haraam halaal ki tamiz bilkul nahi hone ke bawzood bhi jannati hone ka ek lafanga tarika khoj kar wo yahi sabit karna chahte hayn ki bhaiya ham kisi dusre dharm ke insan se nikah kar jannat chale jayenge ...jo sarasar galat hay.maine aise hin ek sonch wale insan ko apne office se sirf is baat par nikal bahar kiya ki wo ek hindu ladki se payar karne ka natak karta tha kayon ki usse shadi kar wo jannat chala jaaye..mujhe sharm aata hay aise logon ko muslim manne pe.
फिरदौस जी बहुत सही कहा आप ने, मै, खुद किसी भी तरह के प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं हु, पर "प्रेम" होना चाहिए, कोई गलत मंसूबा नहीं.
जाहिर सी बात है आप बेवाक हैं, सच कहती हैं, आप की बात "सलीम" मिंया जैसो के दिमाग को समझ ही नहीं आ सकती है,
उनकी अक्ल पर जाकिर नायक का पर्दा पड़ा है, उन्हें तो बस अपना सच सच और दुसरो का सच झूठ और मजाक लगता है.
फिरदौस जी ने पुरे लेख में कही भी किसी धर्म को आहात करने वाली बात नहीं कही है, पर ये सिर्फ उनकी समझ में आएगा जिनका सोच खुली होगी...
चुकी फिरदौस जी बेवाकी से लिखती हैं, सच लिखती हैं|
लिखती रहिये, best of luck
अच्छा किया ।
बहुत ही बढ़िया...विचारणीय पोस्ट
आपने जो काम किय वो मानबता का काम है।आप जिस तरह इतनी मुस्किलों के बाबजूद सच्चाई ब्यान कर रही हैं उसके लिए आप बधाई की पात्र हैं। हमने भी एक लेख लिखा था जन्म-जन्म का साथ है हमारा तुम्हारा या फिर गर्लफ्रैंड चाहिए जिसका सार था कि दूसरों की मां-बहन-वेटी के साथ वैसा ही ब्याबहार करो जैसा आप अपनी मां-बहन-वेटी के साथ होने की अपेक्षा करते हैं पर हम ये देखकर हैरान हो गय कि किसी भी बलागर ने उस पर एक भी टिप्पणी नहीं की ।अगर समय लगे तो आप उस लेख को पढ़ना हो सके तो हमें बताना कि उस लेख में क्या गलत था।
@ firdaus ji
आपके ब्लॉग पर टिप्पणियां बढ़ते ही नीचे की टिप्पणिया अधूरी दिखती है
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@ आदरणीय गोदियाल जी,
"बात सिर्फ लव जेहाद और उसके पीछे की घटिया सोच की हो रही है, किसी पूरे समुदाय पर उंगली उठाने के नहीं ! आप यह कहना चाहते है कि जो साजिस रची जा रही है, उसके खिलाफ हम आवाज न उठाये , लोगो को आगाह न करे ?
तो यहाँ सिर्फ उस खतरे के प्रति आगाह किया जा रहा है और कुछ नहीं !"
नाराज न होइये देव ! आप मानें या न मानें, मैं हर तरह की घटिया सोच के विरूद्ध हूँ, यदि आप और आदरणीय फिरदौस जी आश्वस्त हैं कि 'लव जेहाद' चल रहा है तो मेरा भी विरोध दर्ज किया जाये इस 'लव जेहाद' के खिलाफ। और हाँ, आगाह करने का भी शुक्रिया! (मैं स्वयं एक मिश्रित आबादी में रहता हूँ और मैंने विगत १० साल में यह शब्द नहीं सुना था।)
स्वस्थ माहौल में चर्चा हो, ज्यादा अच्छा रहेगा
"औरतों को जब इस दुनिया में ही 'इंसान' तक नहीं समझा जाता तो फिर जन्नत का सवाल ही बेमानी है... क्योंकि वहां भी तो वही 'क़ानून' लागू होगा, जो यहां है... यानी पुरुष पक्षीय..."
सत्य वचन
Saleem ghabrao mat agar isi maansikta se koi hindu ladka bhi kisi muslim ladki se shadi karta hai to use hum love jihaad, chhal-kapat, neechta ya isi tarah ka kuchh kahenge.
आदरणीय प्रवीण भाई, बड़े अनमने ढंग से सहमत हो रहे हैं गोदियाल जी से… :) :)
आपकी ये बात सही है कि "लव जेहाद" नाम का कोई शब्द नहीं है, लेकिन यह तभी सही है जब इसे "बाल की खाल निकालने" वाले तरीके से देखा जाये… वरना फ़िरदौस जी की पोस्ट और अरशद अली जी टिप्पणी से स्पष्ट है कि अन्दरखाने क्या-क्या सिखाया जा रहा है। कर्नाटक और केरल के माननीय जज भी मान चुके हैं कि कहीं न कहीं कोई गम्भीर गड़बड़ी अवश्य है… अब इसे नाम कुछ भी दिया जाये। दिक्कत यह है कि जब हम इस मामले को उठाते हैं तो तड़ से "साम्प्रदायिक" घोषित कर दिये जाते हैं…
प्रवीण भाई, माना कि आप नास्तिक हैं… मैं भी सहिष्णु हिन्दू बनने की कोशिश कर सकता हूं, लेकिन बाकी दुनिया का क्या कीजियेगा? वह तो हमारे-आपके अनुसार नहीं चलने वाली, और उसका मुकाबला भी करना होगा, उसके मंसूबों को उजागर करना भी होगा…।
दूसरा रुख,
हिन्दू लड़कियों का इस्तेमाल मुस्लिम हस्तियों को कब्र में पहुंचाने के लिए
1. सैयद मोदी की हिन्दू पत्नी ने पहले उसकी हत्या करवाई फिर उसके कातिल के साथ रंगरलियाँ मनाईं.
2. सोहेब इलियासी की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर पहले उसकी हिन्दू पत्नी को हिंदुत्व की दुहाई देकर फांसा गया और फिर उसी की हत्या करके इलज़ाम इलियासी पर थोपकर उसे अँधेरे में बिठा दिया गया.
3. संगीता बिजलानी के द्वारा पहले अजहरुद्दीन का घर बर्बाद किया गया फिर उसे फिक्सिंग के (केवल)आरोपों के द्वारा उसके कैरियर को चौपट कर दिया गया.
4. तेज़ी से आगे बढ़ते सलमान खान का कैरियर चौपट करने के लिए ऐश्वर्या राय को लगाया गया जिसके चक्कर में वह लगभग पागल हो गया था.
5. वर्तमान में हर टैलेंटेड मुस्लिम के पीछे कोई न कोई गैर मुस्लिम लडकी उपस्थित है.
aap ka pryas sarhneey hai aap sadhubad ki patr hai bahut bahut aasirbad
एक लाजवाब प्रस्तुति के लिए आपको धन्यवाद| I Salute U Firdausji.
फिरदौस जी, इन जंगली और असभ्य लोगों में आप कहां मानवता खोज रही हैं.
ये गंदे लोग तो अपनी की मां की कोख को भी लजाते हैं.
वैसे भी 'कीचड़' से बचकर चलना चाहिए.
ब्लोग्वानी को ऐसे असभ्य लोगों के बारे में फिर से विचार करना चाहिए.
आपका प्रयास सराहनीय है.
आप अपनी मुहिम को जारी रखिये.
भारत मां के करोड़ों सपूत आपके साथ हैं.
बहुत ही बढिया तरीका इन लोगो की असलियत खोलने का
फिरदौस जी, आपका ताजा लेख नहीं खुल रहा है... हम सब आप के और आप जैसी मानसिकता वाले हर राष्ट्रप्रेमी हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन .... के साथ हैं..
आपको नमन... जो इन तालिबानियों के सामने इतनी निर्भीकता से खड़ी हैं.
काश दस प्रतिशत अल्पसंख्यक ही आप की तरह सोच रखने लगें...
@Tarkeshwar Giri
मेरी किसी बात में आपको तालिबानी सोच दिख रही है? पुणे विस्फोट पर मेरे अलावा किसी ने ऐसी पोस्ट नहीं लिखी थी.
Ye "IMAPACT" koi Farji Naamdhaari to hai. Ek Ghatiya Soch wala asamaajik vyakti hai.
Aise logon, ko yadi saja n de sake to inse door hi raha jaye. in jaiso ke comment publish karna jaruri nahi hai.
Firdaus ji Aap saleem ji par naraz ho kar apni urja vyarth na nast karen, is tarah ki ghatiya mansikta wale logo se aur koi apeksha bhee nahi ki ja sakti hai. Aapke dwara uthaye gaye sawalon ke jawab to inke pass hain nahi, to shadyantra ke dwara aapki chhawi ko prabhavit karne ki jo kosis ye na karen woh kam hai.
Ab aapke blog par. Ati sundar. Nischit taur par , luv jehad ya dharm youdh ya crusade jo kuchh bhee ho, Mahilaon ko hi apna shikar banane ki mansikta se kab niklenge hum? Aakhir mahilayen hi kyon nishana banti hain har baar dhongi dharmopdeshkon ki?
Aapke dwara chalaye gaye is muhim ko aur jor dene ki jaroorat hai taki yeh dunia vastav me stri aur purush dono ko saman roop se awasar pradan kare izzat ki jindagi jeene ki.
GOOD
shekhar kumawat
http://kavyawani.blogspot.com/
बेजोड़ लेखन के लिए आपको बधाई ।
पहली बार आपको पढ़ा अच्छा लगा, मुस्लिमों मे इस प्रकार की घटनाएं देखने को मिलती है, पता नही मुस्लिम समाज देख की मुख्यधारा मे कब जुडेगा?
एक साहसिक लेखन। आशा है कि लोग इस लेख को सही स्पिरिट में लेंगे। यह धर्म विशेष के विरुद्ध नहीं है बल्कि धर्म के नाम पर पनप रही बुराइयों और कुरीतियों का पर्दाफाश है। इसे समझकर दूर करने की ज़रूरत है। शुभकामनाएँ।
- आनंद
इस लेख को पढ़ कर भाव विभोर हो अश्रु धार प्रवाहित हो चली! भारतीय संस्कृति की सीता का हरण करने देखो, साधू वेश में फिर आया रावण! संस्कृति में ही हमारे प्राण है! भारतीय संस्कृति की रक्षा हमारा दायित्व!! फ़िरदौस ख़ान तुझे नमन, एक ऐसे व्यक्ति का जो आसानी से किसी को नमन नहीं करता -तिलक
फिरदौस जी पूरी सच्चाई से इस्लाम के बारे में बता रही है । वे स्वयं बता रही हैं कि इस्लाम में लविंग जेहाद के नाम पर ( जो पूरी तरह से धोखे पर आधारित है ) पुण्य का कार्य मानते हैं ।
स्वयं ही सही बात कहती हैं कि यदि कोई हिन्दू लड़की मुस्लिम बनती तो उसे पक्का मुसलमान ही बनाया जाता । फिरदौस जी यह सच्चाई है कि इस्लाम में गैर मुस्लिम को मुसलमान बनाने को सबसे शबाब का कार्य माना गया है । कृपया यह लेख पढ़कर इस पर अपने विचार दें । यह लेख पूरी तरह से सउदी अरब द्वारा संचालित साइट इस्लाम हाउस व जाकिर नायक ( प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान के वीडियो पर आधारित है )
जैसे एक फत्वे में कहा गया है कि गैर मुसलमानों के लिए इस्लाम स्वीकार करना अनिवार्य है । उनके (गैर मुसलमानों ) पास केवल तीन विकल्प हैं या तो वे इस्लाम स्वीकार करें या जजिया दें या युद्ध करें । इसी फतवें में गैर मुसलमानों के आगें कोष्ठक में काफिर लिखा है । बेचारे मुसलमान कितने स्पष्ट शब्दों में कहें कि इस्लाम के अलावा किसी अन्य मजहब को स्वीकार करने के योग्य नहीं माना गया है । इसीलिए सभी गैर मुसलमान इस्लाम को शांति का मजहब घोषित करने से पूर्व कृपया इन फतवो का अध्ययन अवश्य कर ले । http://hindusthangaurav.com/islamhouse.asp
इस लव जेहाद को मैंने भी देखा है और पोस्ट भी लिखी थी
http://jayatuhindurastra.blogspot.com/2010/09/blog-post.html
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