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Friday, January 5, 2018

ईवीएम के ख़िलाफ़ मुहिम तेज़

फ़िरदौस ख़ान
देश में इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर संशय बरक़रार है. सियासी दलों के नेताओं का मानना है कि चुनाव के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी कर चुनाव नतीजों को प्रभावित किया गया है. ख़बरों के मुताबिक़ गुजरात के मुख्य चुनाव अधिकारी बीबी स्वैन ने माना है कि कम से कम चार मतदान केंदों पर ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान में गड़बड़ी पाई गई है. उन्होंने बताया कि मतगणना के दिन वागरा, द्वारका, अंकलेश्वर और भावनगर-ग्रामीण सीट पर नये तरह का मामला सामने आया है. क़ाबिले-ग़ौर है कि चुनाव आयोग ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारियों को हर विधानसभा क्षेत्र के कम से कम एक मतदान केंद्र की वोटर वेरीफ़ाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) पर्चियों का ईवीएम में पड़े मतों से मिलान करने का निर्देश दिया था. इस प्रक्रिया में मतदान केंद्र लॊटरी के ज़रिये चुने जाने थे. दरअसल, ईवीएम में गड़बड़ी पाए जाने के बाद इसे सुरक्षित बताने वाले चुनाव आयोग के तमाम दावों की भी पोल खुल गई है. इतना ही नहीं, विपक्ष में रहते ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली भारतीय जनता पार्टी भी मौन साधे हुए है.

ग़ौरतलब है कि कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दाख़िल करके मांग की थी कि मतगणना के दौरान कम से कम 20 फ़ीसद वीवीपैट पर्चियों का ईवीएम से मिलान किया जाए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे ये कहते हुए ख़ारिज कर दिया था कि अदालत तब तक इस मामले में दख़ल नहीं दे सकती, जब तक कि ईवीएम-वीवीपैट पर्चियों के मिलान में कोई गड़बड़ी या फिर पक्षपात नज़र नहीं आता है.

बहरहाल, गुजरात के सूरत में लोग ईवीएम के ख़िलाफ़ सड़क पर उतर आए हैं. लोगों ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया. इस दौरान वे अपने हाथ में पोस्टर भी लिए हुए थे, जिन पर ‘वोट चोरी बंद करो’ और ‘ईवीएम हटाओ लोकतंत्र बचाओ’ जैसे नारे लिखे हुए थे. हाल में उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के दौरान भी ईवीएम में गड़बड़ी के मामले सामने आए थे. मतदाताओं का आरोप था कि ईवीएम में किसी भी पार्टी का बटन दबाने पर वोट भारतीय जनता पार्टी के खाते में जा रहा था. उनका कहना था कि हाथ के निशान और साइकिल के निशान का बटन दबाने पर कमल के निशान की बत्ती जलती थी. जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को ये बात पता चली, तो उन्होंने बूथ के बाहर प्रदर्शन किया था. दोनों दलों के नेताओं ने इस बारे में प्रदेश के चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. उनका यह भी कहना था कि प्रशासन भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है. बहुजन समाज पार्टी इस मामले को लेकर अदालत पहुंच गई थी.

फ़िलहाल सियासी दल ईवीएम के ख़िलाफ़ देशभर में मुहिम चलाने की क़वायद में जुटे हैं. समाजवादी पार्टी ने सियासी दलों को एकजुट करने का फ़ैसला किया है, ताकि आगामी चुनाव ईवीएम की बजाय मतपत्र के ज़रिये कराने का दबाव बनाया जा सके. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव को लेकर जनता के मन में विश्वास होना चाहिए. ईवीएम को लेकर तमाम तरह की शंकाएं हैं,  इसलिए मतपत्र से मतदान होना चाहिए. ईवीएम से जनता का विश्वास खंडित हुआ है. चुनावों में कई जगह ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की शिकायतें आती रहती हैं. मतदान में कुल मतदाता संख्या और पड़े मतों में अंतर की भी काफ़ी शिकायतें होती हैं. यह स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत है. उनका यह भी कहना है कि आज देश में जिस एकाधिकारी राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.

पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल गुजरात में ईवीएम के ख़िलाफ़ मुहिम चलाए हुए हैं. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर पैसे और बेईमानी से चुनाव जीतने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हुई है और यह हक़ीक़त है. उन्होंने कहा कि सूरत, राजकोट और अहमदाबाद में ईवीएम मशीनों में टेपरिंग हुई है, क्योंकि यहां हार और जीत का अंतर बेहद कम है. सूरत की वारछा रोड सीट पर एक लाख पटेल मतदाता हैं, लेकिन वहां रैली में इतनी भीड़ होने के बाद भी अगर हारे तो यह सवाल उठना जायज़ है कि ईवीएम में गड़बड़ी है. उनका यहां तक कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने इसलिए 99 सीटें जीतीं, ताकि कोई ईवीएम पर शंका न करे.उनका कहना है कि ईवीएम के ख़िलाफ़ उनका संघर्ष जारी रहेगा.  इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों को एकसाथ खड़ा होना होगा.

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला और गुजरात चुनाव के प्रभारी अशोक गहलोत ने भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि चुनाव आयोग पूरी तरह पीएम और पीएमओ के दबाव में काम कर रहा है. भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग को बंधक बना लिया है. इस मुद्दे को लेकर दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के दफ़्तर के बाहर प्रदर्शन किया था.
ग़ौरतलब है कि इस साल के शुरू में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के वक़्त से ही बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भारतीय जनता पार्टी पर ईवीएम में छेड़छाड़ करने के आरोप लगा रही हैं. उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने ईवीएम में छेड़छाड़ करके ही विधानसभा चुनाव जीता है. उन्होंने राज्यसभा में ईवीएम से मतदान को बंद करने की मांग की थी.

पूर्व केंद्रीय मंत्री व जनता दल (यू)  के नेता शरद यादव का कहना है जब ईवीएम को लेकर जनता में भ्रम की स्थिति है, तो चुनाव आयोग आख़िर क्यों इस डिब्बे को गले लगाए बैठा है. दूसरी प्रणाली से चुनाव कराने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए. इस मामले में अरविन्द केजरीवाल का कहना है कि चुनाव आयोग धृतराष्ट्र बनकर दुर्योधन को बचा रहा है. उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ियों की ख़बरों को लेकर शिवसेना ने भी भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा था. पार्टी के मुखपत्र ’सामना’ में लिखा था कि उत्तर प्रदेश में जनता का ध्यान बांटने और ईवीएम में छेड़छाड़ के अलावा भाजपा के पास कोई चारा नहीं बचा है. पार्टी का आरोप था कि भाजपा उत्तर प्रदेश में डर्टी पॉलिटिक्स कर रही है. जहां ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं होती, वहां भाजपा कांग्रेस से पिट जाती है. चित्रकूट, मुरैना और सबलगढ़ इस बात का प्रमाण है.

बहरहाल, चुनाव आयोग ने गड़बड़ी पर सफ़ाई पेश की थी कि मशीन ख़राब है. लेकिन उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि मशीन ख़राब है, तो फिर सभी वोट किसी ’विशेष दल’ के खाते में ही क्यों जाते हैं?

Sunday, November 26, 2017

ईवीएम : लोकतंत्र के लिए ख़तरा

फ़िरदौस ख़ान
देश का लोकतंत्र ख़तरे में है. वजह है इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में की जा रही छेड़छाड़. ईवीएम से चुनाव कराने का मक़सद निर्वाचन प्रक्रिया को और बेहतर बनाना था, ताकि इससे जहां वक़्त की बचत हो, मेहनत की बचत हो, वहीं धन की भी बचत हो. इतना ही नहीं, मत पेटियां लूटे जाने की घटनाओं से भी राहत मिल सके. लेकिन अफ़सोस की बात है कि ईवीएम की वजह से चुनाव में धांधली कम होने की बजाय और बढ़ गई. हाल में उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के दौरान ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जब मतदाताओं ने वोट कांग्रेस को दिया है, लेकिन वह किसी अन्य दल के खाते में गया है. इस मामले में कहा जा रहा है कि मशीन ख़राब है. माना कि मशीन ख़राब है, तो फिर सभी वोट किसी ’विशेष दल’ के खाते में ही क्यों जा रहे हैं?

बहुजन समाज पार्टी इस मामले को लेकर अदालत पहुंच गई है. लखनऊ से बहुजन समाज पार्टी की मेयर बुलबुल गोडियाल ने उच्च नयायालय में अर्ज़ी दाख़िल की है. उनका कहना है कि अगर ज़रूरत पड़ी, तो सर्वोच्च न्यायालय भी जाएंगे. उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के पहले चरण के मतदान के दौरान कानपुर में भी ईवीएम मशीन में ग़ड़बड़ी को लेकर ख़ूब हंगामा हुआ था. मतदाताओं का आरोप है कि ईवीएम में किसी भी पार्टी का बटन दबाने पर वोट भारतीय जनता पार्टी के खाते में जा रहा है. उनका कहना है कि हाथ के निशान और साइकिल के निशान का बटन दबाने पर कमल के निशान की बत्ती जलती है. जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को ये बात पता चली, तो उन्होंने बूथ के बाहर प्रदर्शन किया. दोनों दलों के नेताओं ने इस बारे में प्रदेश के चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है. उनका यह भी कहना है कि प्रशासन भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है.

क़ाबिले-ग़ौर है कि इस साल के शुरू में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के वक़्त से ही बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भारतीय जनता पार्टी पर ईवीएम में छेड़छाड़ करने के आरोप लगा रही हैं. उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने ईवीएम में छेड़छाड़ करके ही विधानसभा चुनाव जीता है. उन्होंने राज्यसभा में ईवीएम से मतदान को बंद करने की मांग की थी. उनका कहना था कि इसके लिए क़ानून बनना चाहिए. बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी ने भी आरोप लगाया था कि 2017 की जीत भाजपा की ईमानदारी की जीत नहीं है, ये 2019 को भी ऐसी ही मशीनों का इस्तेमाल कर जीतना चाहते हैं. इन्होंने 2014 के चुनावों में भी धोखा किया था, तब सत्ता में आए थे.
बहुजन समाज पार्टी ईवीएम के ख़िलाफ़ सड़क पर उतर आई थी. पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बीते 11 अप्रैल को ईवीएम के ख़िलाफ़ काला दिवस मनाया था और जगह-जगह धरने-प्रदर्शन किए थे. उनका कहना था कि जब तक चुनाव मतपत्र से कराने की उनकी मांग नहीं मानी जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा.
उस वक़्त बहुजन समाज पार्टी ने विधानसभा चुनावों में ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अर्ज़ी दाख़िल की थी. पार्टी ने अदालत से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की थी. समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अताउर्रहमान ने भी ईवीएम से छेड़छाड़ की अर्ज़ी सर्वोच्च न्यायालय में दाख़िल की थी. इसमें भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ईवीएम को लेकर दायर याचिका पर फ़ैसले के बाद भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ईवीएम के साथ वोटर वेरीफ़ाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) नहीं लगाने की बात कही गई थी. उन्होंने ईवीएम में हर पांचवां वोट भारतीय जनता पार्टी को पड़ने और ईवीएम से छेड़छाड़ के सुबूत होने की बात कही थी.
ग़ौरतलब यह भी है कि उस वक़्त कांग्रेस की अगुवाई में देश के सियासी दल ईवीएम के ख़िलाफ़ एकजुट हुए थे. तक़रीबन 16 बड़े सियासी दलों ने विधानसभा चुनावों में मतदान के लिए इस्तेमाल हुईं ईवीएम के साथ छेड़छाड़ होने की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इनके प्रति अपना अविश्वास ज़ाहिर किया था. उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की थी कि आगामी चुनावों में मतदान के लिए ईवीएम की बजाय काग़ज़ के मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाए. उनका आरोप था कि केंद्र सरकार ईवीएम को फुलप्रूफ़ बनाने के लिए वोटर वेरीफ़ाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) सुनिश्चित कराने के लिए चुनाव आयोग को ज़रूरी रक़म मुहैया कराने में कोताही बरत रही है.

विपक्षी दलों की तरफ़ से चुनाव आयोग को दिए गए ज्ञापन में कहा गया था कि चुनाव कराने के तौर तरीक़ों को लेकर सियासी दलों के बीच एक राय है, लेकिन वे फ़िलहाल चुनाव के लिए ईवीएम का इस्तेमाल करने के ख़िलाफ़ हैं. वे चाहते हैं कि मतदान के लिए काग़ज़ के मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाए. इसलिए जब तक ईवीएम के साथ छेड़छाड़ होने और उसमें गड़बड़ी की मसला हल नहीं हो जाता और जब तक राजनीतिक दलों की संतुष्टि के लिहाज़ से यह तकनीकी तौर पक्का नहीं हो जाता कि ईवीएम बिना किसी दिक़्क़त के काम करेंगी और इसकी पुष्टि वैश्विक स्तर पर नहीं हो जाती, तब तक मतदान पुराने मतपत्र वाली व्यवस्था के हिसाब से ही हो. मतपत्रों के ज़रिये मतदान की व्यवस्था को दुनियाभर में मान्यता मिली हुई है. सेक्शन 61ए के तहत चुनाव आयोग के विवेक का इस्तेमाल तभी किया जाए, जब सभी राजनीतिक दलों की संतुष्टि के साथ उन दिक़्क़तों का दूर कर लिया जाए.

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह का कहना था कि अगले चुनाव, भले ही गुजरात में हों या कहीं और, मतपत्र के साथ होने चाहिए और ईवीएम का इस्तेमाल बंद होना चाहिए. उनकी दलील थी कि अगर बैंक ऒफ़ बांग्लादेश के खातों को हैक किया जा सकता है और आठ करोड़ डॊलर चुराए जा सकते हैं, रूसी बैंक से तीन करोड़ डॊलर निकाले जा सकते हैं, तो ईवीएम के साथ छेड़छाड़ क्यों नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि ईवीएम के मामले में वे आडवाणी से लेकर मायावती और केजरीवाल तक के साथ हैं. सनद रहे कि लालकृष्ण आडवाणी ने साल 2009 के आम चुनाव में ईवीएम को लेकर सवाल उठाए थे.

दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग को चुनौती दी थी कि अगर ईवीएम मशीन उन्हें दे दी जाए, तो 72 घंटों के अंदर वह साबित कर देंगे कि इन मशीनों के साथ छेड़छाड़ मुमकिन है. चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग की इस दलील को नकार दिया था कि ईवीएम में एक बार सॊफ़्टवेयर लगाने के बाद ना तो इसे पढ़ा जा सकता है और ना ही इस पर कुछ लिखा जा सकता है. उन्होंने मध्य प्रदेश के भिंड में गड़बड़ी वाले ईवीएम के सॊफ़्टवेयर से जुड़ा डाटा सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा था कि अगर चुनाव आयोग के पास डाटा डीकोड करने का तंत्र उपलब्ध नहीं है, तो वह अपने विशेषज्ञों की टीम से गड़बड़ पाई गई मशीनों का सॊफ़्टवेयर 72 घंटे में डीकोड करके आयोग को इसकी रिपोर्ट दे सकते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि ईवीएम की तरह वोटर वेरीफ़ाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) में भी अपने हिसाब से बदलाव किया जा सकता है. ख़बर है कि गुजरात में ईवीएम के परीक्षण के दौरान कांग्रेस को 21 वोट डाले गए और पर्ची भी 21 वोट की निकली, लेकिन कांग्रेस के खाते में सिर्फ़ सात वोट ही गए.

हालांकि चुनाव आयोग ईवीएम को सुरक्षित बता रहा है. इतना ही नहीं, विपक्ष में रहते ईवीएम मशीन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को भी अब ईवीएम पाक-साफ़ नज़र आ रही है. इस मामले में अरविन्द केजरीवाल का कहना है कि चुनाव आयोग धृतराष्ट्र बनकर दुर्योधन को बचा रहा है. उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ियों की ख़बरों को लेकर शिवसेना ने भी भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है. पार्टी के मुखपत्र ’सामना’ में लिखा है कि उत्तर प्रदेश में जनता का ध्यान बांटने और ईवीएम में छेड़छाड़ के अलावा भाजपा के पास कोई चारा नहीं बचा है. पार्टी का आरोप है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में डर्टी पॉलिटिक्स कर रही है. जहां ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं होती, वहां भाजपा कांग्रेस से पिट जाती है. चित्रकूट, मुरैना और सबलगढ़ इस बात का प्रमाण है.

बहरहाल, ईवीएम से छेड़छाड़ के मामले सामने आने के बाद सियासी दलों में इनके प्रति अविश्वास पैदा हो गया है. इसके साथ-साथ जनमानस में भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भरोसा ख़त्म हुआ है. सियासी दलों के कार्यकर्ता ईवीएम की बजाय मतपत्र से मतदान की मांग को लेकर मुहिम छेड़े हुए हैं. महाराष्ट्र की रिसोड़ तहसील के इंदिरा निष्ठावंत समर्थक ओंकार तोष्णीवाल कहते हैं कि भस्मासुरी शक्तियां ईवीएम को कितना ही अपने पक्ष में कर लें, लेकिन उन असुरी शक्तियों का विनाश होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा.

बहरहाल, ईवीएम गड़बड़ी मामले में चुनाव आयोग जिस तरह का रवैया अख़्तियार किए हुए है, वह भी संतोषजनक नहीं है. इसमें कोई दो राय नहीं कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक है. लोकतंत्र यानी जनतंत्र. जनतंत्र इसलिए क्योंकि इसे जनता चुनती है. लोकतंत्र में चुनाव का बहुत महत्व है. निष्पक्ष मतदान लोकतंत्र की बुनियाद है. यह बुनियाद जितनी मज़बूत होगी, लोकतंत्र भी उतना ही सशक्त और शक्तिशाली होगा. अगर यह बुनियाद हिल जाए, तो लोकतंत्र की दीवारों को दरकने में ज़रा भी देर नहीं लगेगी. फिर लोकतंत्र, राजतंत्र में तब्दील होने लगेगा. नतीजतन, मुट्ठी भर लोग येन-केन-प्रकारेण चुनाव जीतकर लोकतंत्र पर हावी हो जाएंगे. इसीलिए चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव निष्पक्ष हों. अगर सियासी दल मतपत्र से चुनाव की मांग कर रहे हैं, तो इसे मंज़ूर किया जाना चाहिए. अगर सरकार और चुनाव आयोग ऐसा नहीं करते हैं, तो फिर लोकतांत्रिक प्रणाली का क्या महत्व रह जाता है. इसीलिए बेहतर यही होगा कि मतदान ईवीएम की बजाय मतपत्र के ज़रिये हो.

Friday, April 21, 2017

ईवीएम : और शक बढ़ता गया

फ़िरदौस ख़ान
लोकतंत्र यानी जनतंत्र. जनतंत्र इसलिए क्योंकि इसे जनता चुनती है. लोकतंत्र में चुनाव का बहुत महत्व है. निष्पक्ष मतदान लोकतंत्र की बुनियाद है. यह बुनियाद जितनी मज़बूत होगी, लोकतंत्र भी उतना ही सशक्त और शक्तिशाली होगा. अगर यह बुनियाद हिल जाए, तो लोकतंत्र की दीवारों को दरकने में देर नहीं लगेगी. फिर लोकतंत्र, राजतंत्र में तब्दील होने लगेगा. नतीजतन, मुट्ठी भर लोग येन-केन-प्रकारेण चुनाव जीतकर लोकतंत्र पर हावी हो जाएंगे.

देश की आज़ादी के बाद निरंतर चुनाव सुधार किए गए. मसलन मतदाता की उम्र घटाकर कम की गई, जन मानस ख़ासकर युवाओं और महिलाओं को मतदान के लिए प्रोत्साहित किया गया. इन सबसे बढ़कर मत-पत्र के इस्तेमाल की बजाय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) द्वारा मतदान कराया जाने लगा. इससे जहां वक़्त की बचत हुई, श्रम की बचत हुई, वहीं धन की भी बचत हुई. इतना ही नहीं, मत पेटियां लूटे जाने की घटनाओं से भी राहत मिली. सियासी दलों को मलाल है कि ईवीएम की वजह से चुनाव में धांधली कम होने की बजाय और बढ़ गई. चुनाव में ईवीएम से छेड़छाड़ के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इस तरह की ख़बरें देखने-सुनने को मिल रही हैं कि बटन किसी एक पार्टी के पक्ष में दबाया जाता है और वोट किसी दूसरी पार्टी के खाते में चला जाता है. इसके अलावा जितने लोगों ने मतदान किया है, मशीन उससे कई गुना ज़्यादा वोट दिखा रही है.

कांग्रेस की अगुवाई में देश के सियासी दल ईवीएम के ख़िलाफ़ एकजुट हो रहे हैं. तक़रीबन 16 बड़े सियासी दलों ने हाल के चुनावों में मतदान के लिए इस्तेमाल हुईं ईवीएम के साथ छेड़छाड़ होने की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इनके प्रति अपना अविश्वास ज़ाहिर किया है. उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि आगामी चुनावों में मतदान के लिए ईवीएम की बजाय काग़ज़ के मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाए. उनका आरोप है कि केंद्र सरकार ईवीएम को फुलप्रूफ़ बनाने के लिए वोटर वेरीफ़ाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) सुनिश्चित कराने के लिए चुनाव आयोग को ज़रूरी रक़म मुहैया कराने में कोताही बरत रही है.
विपक्षी दलों की तरफ़ से चुनाव आयोग को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि चुनाव कराने के तौर तरीक़ों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच एक राय है, लेकिन वे फ़िलहाल चुनाव के लिए ईवीएम का इस्तेमाल करने के ख़िलाफ़ हैं. वे चाहते हैं कि मतदान के लिए काग़ज़ के मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाए. इसलिए जब तक ईवीएम के साथ छेड़छाड़ होने और उसमें गड़बड़ी की समस्या का समाधान नहीं हो जाता और जब तक राजनीतिक दलों की संतुष्टि के लिहाज़ से यह तकनीकी तौर पक्का नहीं हो जाता कि ईवीएम बिना किसी दिक़्क़त के काम करेंगे और इसकी पुष्टि वैश्विक स्तर पर नहीं हो जाती, तब तक मतदान पुराने मतपत्र वाली व्यवस्था के हिसाब से ही हो. मतपत्रों के ज़रिये मतदान की व्यवस्था को दुनियाभर में मान्यता मिली हुई है. सेक्शन 61ए के तहत चुनाव आयोग के विवेक का इस्तेमाल तभी किया जाए, जब सभी राजनीतिक दलों की संतुष्टि के साथ उन दिक़्क़तों का दूर कर लिया जाए.

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह का कहना है कि अगले चुनाव, भले ही गुजरात में हों या कहीं और, मतपत्र के साथ होने चाहिए और ईवीएम का इस्तेमाल बंद होना चाहिए. उनकी दलील है कि अगर बैंक ऒफ़ बांग्लादेश के खातों को हैक किया जा सकता है और आठ करोड़ डालर चुराए जा सकते हैं, रूसी बैंक से तीन करोड़ डॊलर निकाले जा सकते हैं, तो ईवीएम के साथ छेड़छाड़ क्यों नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि ईवीएम के मामले में वह आडवाणी से लेकर मायावती तथा केजरीवाल तक के साथ हैं. ग़ौरतलब है कि लालकृष्ण आडवाणी ने साल 2009 के आम चुनाव में ईवीएम को लेकर सवाल उठाए थे.

दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग को चुनौती दी है कि अगर ईवीएम मशीन उन्‍हें दे दी जाए, तो 72 घंटों के अंदर वह साबित कर देंगे कि इन मशीनों के साथ छेड़छाड़ मुमकिन है. चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग की इस दलील को नकार दिया कि ईवीएम में एक बार सॊफ़्टवेयर लगाने के बाद ना तो इसे पढ़ा जा सकता है और ना ही इस पर कुछ लिखा जा सकता है. उन्होंने मध्य प्रदेश के भिंड में गड़बड़ी वाले ईवीएम के सॊफ़्टवेयर से जुड़ा डाटा सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा है कि अगर चुनाव आयोग के पास डाटा डीकोड करने का तंत्र उपलब्ध नहीं है, तो वह अपने विशेषज्ञों की टीम से गड़बड़ पाई गई मशीनों का सॊफ़्टवेयर 72 घंटे में डीकोड करके आयोग को इसकी रिपोर्ट दे सकते हैं.

बहुजन समाज पार्टी ईवीएम के ख़िलाफ़ सड़क पर उतर आई है. पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बीते 11 अप्रैल को ईवीएम के ख़िलाफ़ काला दिवस मनाया और जगह-जगह धरने प्रदर्शन किए. उनका कहना है कि जब तक चुनाव मतपत्र से कराने की उनकी मांग नहीं मानी जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा. पार्टी अध्यक्ष मायावती ने भी राज्यसभा में ईवीएम से मतदान को बंद करने और इसके लिए जारी बजट सत्र में ही विधेयक लाने की मांग की है. उनका कहना है कि इसके लिए क़ानून बनना चाहिए और जारी सत्र में ही इससे संबंधित विधेयक आना चाहिए. पार्टी के महासचिव महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी का आरोप है कि 2017 की जीत बीजेपी की ईमानदारी की जीत नहीं है, ये 2019 को भी ऐसी ही मशीनों का इस्तेमाल कर जीतना चाहते हैं. इन्होंने 2014 के चुनावों में भी धोखा किया था, तब सत्ता में आए थे.
ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों बहुजन समाज पार्टी ने विधानसभा चुनावों में ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अर्ज़ी दाख़िल की है. पार्टी ने अदालत से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की है.समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अताउर्रहमान ने भी ईवीएम से छेड़छाड़ की अर्ज़ी सर्वोच्च न्यायालय में दाख़िल की है. इसमें भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ईवीएम को लेकर दायर याचिका पर फ़ैसले के बाद भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ईवीएम के साथ वोटर वेरीफ़ाइड पेपर ऑडिट ट्रेल नहीं लगाने की बात कही गई है. उन्होंने ईवीएम में हर पांचवां वोट भारतीय जनता पार्टी को पड़ने और ईवीएम से छेड़छाड़ के सुबूत होने की बात कही है.

हालांकि चुनाव आयोग ईवीएम को सुरक्षित बता रहा है. इतना ही नहीं, विपक्ष में रहते ईवीएम मशीन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को भी अब ईवीएम पाक-साफ़ नज़र आ रही है.
बहरहाल, ईवीएम से छेड़छाड़ के मामले सामने आने के बाद सियासी दलों में इनके प्रति अविश्वास पैदा हो गया है. इसके साथ-साथ जन मानस में भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भरोसा ख़त्म हुआ है. इतना ही नहीं, इस मामले में चुनाव आयोग जिस तरह का रवैया अख़्तियार किए हुए है, वह भी संतोषजनक नहीं है.

बहरहाल, ईवीएम के साथ छेड़छाड़ लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक है. चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव निष्पक्ष हों. अगर सियासी दल मतपत्र से चुनाव की मांग कर रहे हैं, तो इसे मंज़ूर किया जाना चाहिए. अगर सरकार और चुनाव आयोग ऐसा नहीं करते हैं, तो फिर लोकतांत्रिक प्रणाली का क्या महत्व रह जाता है.

Monday, May 19, 2014

ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल



क्या आपका वोट उसी उम्मीदवार के खाते में गया है, जिसे आपने वोट डाला था...?
इलेक्ट्रॊनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी के मुताबिक़ ख़ुद चुनाव आयोग ने ईवीएम हैकिंग को पकड़ा है, जहां किसी भी बटन को दबाने पर वोट भाजपा के खाते में ही गया था, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं गई. उन्होंने एक फ़िल्म के ज़रिये समझाया था कि कैसे ईवीएम की मॉस हैकिंग की जा सकती है, मतलब एक साथ हज़ारों मशीनों से मनपसंद वोट डलवाए जा सकते हैं. उन्होंने बैलेट पेपर्स से चुनाव कराए जाने की मांग की थी, जिससे वोट करने वाले को पता रहे कि उसका वोट किस उम्मीदवार को पड़ा है.
ईवीएम में धांधली की कई ख़बरें सामने आ रही हैं. इसकी निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके...



Indian voting machines Hacked