Tuesday, May 8, 2012

वर्चुअल दोस्ती के ख़तरे...




-फ़िरदौस ख़ान
झूठ की बुनियाद पर बनाए गए रिश्तों की उम्र बस उस वक़्त तक ही होती है, जब तक झूठ पर पर्दा पड़ा रहता है. जैसे ही सच सामने आता है, वो रिश्ता भी दम तोड़ देता है. अगर किसी इंसान को कोई अच्छा लगता है और वो उससे उम्रभर का रिश्ता रखना चाहता है तो उसे सामने वाले व्यक्ति से झूठ नहीं बोलना चाहिए. जिस दिन उसका झूठ सामने आ जाएगा. उस वक़्त उसका रिश्ता तो टूट ही जाएगा, साथ ही वह हमेशा के लिए नज़रों से भी गिर जाएगा. कहते हैं- इंसान पहाड़ से गिरकर तो उठ सकता है, लेकिन नज़रों से गिरकर कभी नहीं उठ सकता. ऐसा भी देखने में आया है कि कुछ अपराधी प्रवृति के लोग ख़ुद को अति सभ्य व्यक्ति बताते हुए महिलाओं से दोस्ती गांठते हैं, फिर प्यार के दावे करते हैं. बाद में पता चलता है कि वो शादीशुदा हैं और कई बच्चों के बाप हैं. दरअसल, ऐसे बाप टाईप लोग हीन भावना का शिकार होते हैं. अपराधी प्रवृति के कारण उनकी न घर में इज्ज़त होती है और न ही बाहर. उनकी हालत धोबी के कुत्ते जैसी होकर रह जाती है यानी धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का. ऐसे में वे सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपना अच्छा सा प्रोफाइल बनाकर ख़ुद को महान साबित करने की कोशिश करते हैं. वह ख़ुद को अति बुद्धिमान, अमीर और न जाने क्या-क्या बताते हैं, जबकि हक़ीक़त में उनकी कोई औक़ात नहीं होती. ऐसे लोगों की सबसे बड़ी 'उपलब्धि' यही होती है कि ये अपने मित्रों की सूची में ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को शामिल करते हैं. कोई महिला अपने स्टेट्स में  कुछ भी लिख दे, फ़ौरन उसे 'लाइक' करेंगे, कमेंट्स करेंगे और उसे चने के झाड़ पर चढ़ा देंगे. ऐसे लोग समय-समय पर महिलाएं बदलते रहते हैं, यानी आज इसकी प्रशंसा की जा रही है, तो कल किसी और की. लेकिन कहते हैं न कि काठ की हांडी बार-बर नहीं चढ़ती. 

वक़्त दर वक़्त ऐसे मामले सामने आते रहते हैं. ब्रिटेन में हुए एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि ऑनलाइन रोमांस के चक्कर में तक़रीबन दो लाख लोग धोखा खा चुके हैं. धोखा देने वाले लोग अपनी असली पहचान छुपाकर रखते थे और आकर्षक मॉडल और सेना अधिकारी की तस्वीर अपनी प्रोफाइल पर लगाकर लोगों को आकर्षित किया करते थे. ऐसे में सोशल नेटवर्किंग साइटों का इस्तेमाल करने वाले लोगों का उनके प्रति जुड़ाव रखना स्वाभाविक ही था, लेकिन जब उन्होंने झूठे प्रोफाइल वाले लोगों से मिलने की कोशिश की तो उन्हें सारी असलियत पता चल गई. कई लोग अपनी तस्वीर तो असली लगाते हैं, लेकिन बाक़ी जानकारी झूठी देते हैं. झूठी प्रोफाइल बनाने वाले या अपनी प्रोफ़ाइल में झूठी जानकारी देने वाले लोग महिलाओं को फांसकर उनसे विवाह तक कर लेते हैं. सच सामने आने पर उससे जुड़ी महिलाओं की ज़िन्दगी बर्बाद होती है. एक तरफ़ तो उसकी अपनी पत्नी की और दूसरी उस महिला की जिससे उसने दूसरी शादी की है.

बीते माह मार्च में एक ख़बर आई थी कि अमेरिका में एक महिला ने सोशल नेटवर्किंग साइट फ़ेसबुक पर अपने पति की दूसरी पत्नी को खोज निकाला. फ़ेसबुक पर बैठी इस महिला ने साइड में आने वाले पॉपअप ‘पीपुल यू मे नो’ में एक महिला को दोस्त बनाया. उसकी फ़ेसबुक पर गई तो देखा कि उसके पति की वेडिंग केक काटते हुए फोटो थी. समझ में नहीं आया कि उसका पति किसी और के घर में वेडिंग केक क्यों काट रहा है? उसने अपने पति की मां को बुलाया, पति को बुलाया. दोनों से पूछा, माजरा क्या है? पति ने पहली पत्नी को समझाया कि ज़्यादा शोर न मचाये, हम इस मामले को सुलझा लेंगे. मगर इतने बड़े धोखे से आहत महिला ने घर वालों को इसकी जानकारी दी. उसने अधिकारियों से इस मामले की शिकायत की. अदालत में पेश दस्तावेज़ के मुताबिक़  दोनों अभी भी पति-पत्नी हैं. उन्होंने तलाक़ के लिए भी आवेदन नहीं किया. अब दोषी पाए जाने पर पति को एक साल की जेल हो सकती है. पियर्स काउंटी के एक अधिकारी के मुताबिक़, एलन ओनील नाम के इस व्यक्ति ने 2001 में एलन फल्क के अपने पुराने नाम से शादी की. फिर 2009 में पति ओनील ने नाम बदलकर एलन करवा लिया था और किसी दूसरी महिला से शादी कर ली थी. उसने  पहली पत्नी को तलाक़ नहीं दिया था.

दरअसल, सोशल नेटवर्किंग साइट्स के कारण रिश्ते तेज़ी से टूट रहे हैं. अमेरिकन एकेडमी ऑफ मैट्रीमोनियल लॉयर्स के एक सर्वे में भी यह बात सामने आई है. सर्वे के मुताबिक़ तलाक़ दिलाने वाले क़रीब 80 फ़ीसद वकीलों ने माना कि उन्होंने तलाक़ के लिए सोशल नेटवर्किंग पर की गई बेवफ़ाई वाली टिप्पणियों को अदालत में एक साक्ष्य के रूप में पेश किया है. तलाक़ के सबसे ज़्यादा मामले फ़ेसबुक से जुड़े हैं. 66 फ़ीसद मामले फ़ेसबुक से, 15 फ़ीसद माईस्पेस से, ट्विटर से पांच फ़ीसद और बाक़ी दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइट्स से 14 फ़ीसद मामले जुड़े हैं. इन डिजिटल फुटप्रिंट्स को अदालत में तलाक़ के एविडेंस के रूप में पेश किया गया. पिछले दिनों अभिनेत्री इवा लांगोरिया ने बास्केट बाल  खिलाड़ी अपने पति टोनी पार्कर का तलाक़ दे दिया. इवा का आरोप है कि फ़ेसबुक पर उसके पति टोनी और एक महिला की नज़दीकी ज़ाहिर हो रही थी. ब्रिटेन में भी सोशल नेटवर्किंग साइट्स की वजह से तलाक़ के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. अपने साथी को धोखा देकर ऑनलाइन बात करते हुए पकड़े जाने के कारण तलाक़ के मामलों में इज़ाफ़ा हुआ है. ब्रिटिश न्यूज पेपर 'द सन' के मुताबिक़, पिछले एक साल में फ़ेसबुक पर की गईं आपत्तिजनक टिप्पणियां तलाक़ की सबसे बड़ी वजह बनीं. रिश्ते ख़राब होने और टूटने के बाद लोग अपने साथी के संदेश और तस्वीरों को तलाक़ की सुनवाई के दौरान इस्तेमाल कर रहे हैं.

सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जहां कुछ फ़ायदें हैं, वहीं नुक़सान भी हैं. इसलिए सोच-समझ कर ही इनका इस्तेमाल करें. अपने आसपास के लोगों को वक़्त दें, उनके साथ रिश्ते निभाएं. सोशल नेटवर्किंग साइट्स के आभासी मित्रों से परस्पर दूरी बनाकर रखें.  कहीं ऐसा न हो कि आभासी फ़र्ज़ी दोस्तों के चक्कर में आप अपने उन दोस्तों को खो बैठें, जो आपके सच्चे हितैषी हैं.  (स्टार न्यूज़  एजेंसी)

13 Comments:

वाणी गीत said...

अच्छी सलाह ...सार्थक आलेख!

Arvind Mishra said...

मैंने कई बार सोचा कि अपनी उपस्थति दर्ज करूँ या न करूँ -चलिए कर दे रहा हूँ ..
हर व्यक्ति ही तो अब संशय की नज़र से देखा जा रहा है! यह सही है कि कई लोगों के टेलर मेड
प्रोफाईल इन्फो एक ऐसी ही प्रवृत्ति को उजागर करते हैं ....बाईसेप्स,कार ,वैभव, विदेशी
कुत्ते ...आदि आदि -मगर होते हैं सचमुच धोबी के कुत्ते ही :)

प्रवीण पाण्डेय said...

पारदर्शिता बहुतों के लिये घातक भी हो जाती है।

shikha varshney said...

बिलकुल सही .सोच समझ कर ही इनका इस्तेमाल करना चाहिए.

Satish Saxena said...

यह तो जीवन की सच्चाई लिख दी हैं अधिकतर लोग नकाब लगाए हैं ...

शूरवीर रावत said...

सार्थक व प्रासंगिक भी. आज की हकीकत को बयां करता आपका यह लेख प्रभावित करता है। धोखाधडी तो लोग पहले भी करते थे किन्तु अब तरीका बदल गया है व क्षेत्र व्यापक हो गया है।

mukti said...

मुझे लगता है कि वर्चुअ आधार पर शादी जैसे रिश्ते बनाने वाले लोग बेवकूफ हैं. ऐसे लोग अपवाद होते हैं और हर जगह होते हैं, चाहे वास्तविक दुनिया हो या वर्चुअल.

vedvyathit said...

bilkul thik kha hai aap ne

संतोष त्रिवेदी said...

ऐसे लोगों की कोई वास्तविक पहचान नहीं है.एक बार छल-छद्म खुल जाने पर बहुत से सतर्क हो जाते हैं,पर जो लोग आँख-कान मूंदकर ऐसी वर्चुअल दुनिया को असल दुनिया मान लेते हैं,वे ही बाद में माथा पकड़ते हैं.
जिस व्यक्ति मन मानवीय-मूल्य नहीं हैं,वह समाज में किसी के लायक नहीं है.ऐसे व्यक्ति सिनिक और आत्ममुग्धता के शिकार होते हैं !

Smart Indian said...

विचारणीय प्रस्तुति के लिये आभार! आभासी जगत में लोग भी वास्तविक हैं और उनकी मनोवृत्तियाँ भी। तब फिर खतरे तो होने ही हैं। यदि एलन ओ'नील ने क़ानून तोड़ा है तो उसे सज़ा मिलनी ही चाहिये लेकिन अपराधी मनोवृत्ति किसी धर्म, जाति, लिंग या राष्ट्रीयता की ग़ुलाम नहीं होती। ऐसी महिलायें भी हैं जो माँ और पत्नी होते हुए भी नवयुवकों को अपने जाल में फ़ांस चुकी हैं। इसी प्रकार कई छद्मनामी लोग इंटरनेट पर खुलेआम भारतीय संविधान का, भारतमाता का, किसी माता का, कभी किसी धर्म का और कभी किसी विचारधारा का खुले आम अपमान करते रहते हैं। पता नहीं प्रशासन कहाँ सो रहा है! :(

Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता said...

साथी समक्ष हो या आभासी - इंसान को अँधा विश्वास करने से पहले जांच परख तो करनी ही चाहिए | लोग यह नेट पर प्रेम में कैसे पड़ जाते हैं मैं समझ नहीं पाती |

मूर्खता की तो कोई सीमा नहीं होता न .....

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

नेक सलाह सार्थक आलेख,...

my recent post....काव्यान्जलि ...: कभी कभी.....

Anonymous said...

कोई भी वास्तु का उपयोग अथवा दुरूपयोग तो मनुष्य पर निर्भर करता है परन्तु फिर भी सभी वस्तुओं की एक मूल प्रकृति होती है और दुर्भाग्य से उस कसौटी पर ये सोशल नेटवर्किंग साइट्स विघटनकारी ही सिद्ध हो रही हैं|

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