वो वादा ही क्या जो वफ़ा हो जाए... लेकिन हमने वादा निभा दिया है... क्योंकि वादा खिलाफ़ी तो हमारी फ़ितरत में शामिल ही नहीं...
कुछ देर पहले हमारी अनुराग मुस्कान जी से बात हो रही थी... हाल ही में उनका पहला व्यंग्य संग्रह शाया हुआ है-चौथा बंदर... हमने अनुराग से वादा किया था कि आपकी किताब की समीक्षा लिखेंगे...वादा उन दिनों का था जब हम उनके लेख देखकर उनसे कहा करते थे कि आप इतना अच्छा लिखते हैं किताब शाया क्यों नहीं कराते... वे हंस कर टाल देते और कहते स्टार न्यूज़ की एंकरिंग से फ़ुर्सत मिले तो कुछ किया भी जाए... ख़ैर, न हमने हार मानी न स्टार न्यूज़ वालों ने उन्हें वक़्त दिया... आख़िर, अनुराग ने कड़ी मशक्क़त करके किताब तैयार कर ही ली... उनकी मेहनत रंग लाई और किताब आकर्षक रंग-रूप के साथ हमारे हाथ में आ ही गई... अपने वादे के मुताबिक़ हम किताब की समीक्षा भी लिख चुके हैं...आख़िर एक दोस्त से किया वादा कैसे तोड़ सकते हैं...
अनुराग मुस्कान के बारे में क्या कहें...बस नाम ही काफ़ी है... अनुराग किसी परिचय के मोहताज नहीं... बेहद ख़ूबसूरत शख्सियत के मालिक अनुराग बहुत अच्छे एंकर होने के साथ-साथ बहुत अच्छे लेखक और अच्छे अच्छे फोटोग्राफ़र भी हैं...हमारी नज़्मों, गज़लों और लेखों के लिए वे ख़ुद की खींची तस्वीरें भेजते रहे हैं...इसके लिए हम उनके तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हैं... इसी साल के शुरू में उन्होंने हमें एक टेबल कैलेंडर भेजा था... ख़ूबसूरत 12 तस्वीरों से सजा बेहद आकर्षक कैलेंडर... यह कैलेंडर अनुराग ने ही बनवाया था...
बक़ौल अनुराग-अब अपने मुंह अपनी तारीफ़ क्या करूं...आगरे का हूं, सो बचपन से ही ख़्वाबों के 'ताजमहल' बनाने की आदत रही है... कुछ मीनारें तो खड़ी कर पाया हूं शायद, बस, इमारत का तामीर होना अभी बाक़ी है... विगत दस वर्षों से इलैक्ट्रॉनिक मीडिया से संबद्ध हूं, वर्तमान में 'स्टार न्यूज़' में एंकर! लेखन के लिए किसी तरह वक़्त निकाल ही लेता हूं... विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में व्यंग्य, लेख एवं कहानियां प्रकाशित, आगरा आकाशवाणी एवं मंचों के लिए नाट्य लेखन में सक्रिय... कभी सालों तक मंचों पर काव्य पाठ किया और अपनी लिखीं ग़ज़लें भी पढ़ी है... फ़ोटोग्राफ़ी का भी शौक़ है, अपना एसएलआर कैमरा हमेशा अपने साथ रखता हूं... थोड़े लिखे को ही बहुत समझें...
पुस्तक के बारे में प्रख्यात व्यंग्यकार ज्ञान चतुर्वेदी का कहना है :
''अनुराग के लेखन में वैसा बहुत कुछ दिखता है जैसा ज्यादातर दिखता नहीं है. यह व्यंग्य-संग्रह अपनी विशेषताओं और सीमाओं के बीच भीड़ से अलग लगेगा, यह मैं कह सकता हूं. यही बड़ी बात है, वरना आजकल यह कह पाने को भी तरस जाता हूं.''
ख़ैर, अनुराग की किताब को ज़रूर पढ़ें... यक़ीन मानिए अगर एक बार किताब हाथ में थाम ली तो पूरी पढ़े बिना नहीं रह सकेंगे...
किताब का नाम : चौथा बंदर (व्यंग्य-संग्रह)
लेखक : अनुराग मुस्कान
मूल्य : सजिल्द : 290 .00
अंतिका प्रकाशन
सी 56 / यूजीएफ-4 , शालीमार गार्डेन एक्सटेंशन-2
गाज़ियाबाद 201005 (उ. प्र. )
फोन 0120-6475212
Email : antika56@gmail.com
समीक्षा बाद में पोस्ट करेंगे...








11 Comments:
."आगरे का हूं, सो बचपन से ही ख़्वाबों के 'ताजमहल' बनाने की आदत रही है" - फिरदौस जी - अनुराग मुस्कान जी के इस असाधारण वाक्य के क्या कहने? बहुत अच्छा लगा। और बहुत कुछ अच्छा लगा उनके बारे में जानकर। बधाई अनुराग मुस्कान जी।
सादर
श्यामल सुमन
www.manoramsuman.blogspot.com
चौथा बंदर शीर्षक ही अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है।
उनके फेसबुक अकाउंट के माध्यम से उनकी इस किताब के बारे में मालूम हुआ था, पढ़ी... बहुत ही बेहतरीन लिखा है... बहुत-बहुत मुबारक हो!
मुझे अभी भी किताबों के दाम से ही शिकायत होती है. फिर भी किताब पढ़ी जाएगी.
अनुराग जी से मिलकर अच्छा लगा।
शुक्रिया।
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आपका सुनहरा भविष्यफल, सिर्फ आपके लिए।
खूबसूरत क्लियोपेट्रा के बारे में आप क्या जानते हैं?
पुस्तक का शीर्षक तो बहुत आकर्षक लग रहा है.
अनुराग जी को कई बार देखा है स्तर न्यूज पर बहुत अच्छे एंकर हैं हालाँकि ...न्यूज तो भारतीय मीडिया की देखने लायक रही नहीं अब :) हाँ यह पुस्तक पठनीय लग रही है.
अनुराग जी से परिचय कराने के लिए धन्यवाद !
गाँधी जी के तीन बंदरों के बाद यह चौथा बन्दर भी कमाल का ही होगा !
अब पढ़ना तो पड़ेगा ही !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ
achchi jankari di hai,zaroor padhoongi.
अनुराग जी से परिचय कराने के लिए धन्यवाद !बधाई अनुराग मुस्कान जी।
बहुत बहुत शुक्रिया फिरदौस...इस किताब से परिचय करवाने के लिए.
अनराग जी,बहु आयामी प्रतिभा के धनी है...अच्छा लगा,उनके कई गुणों के बारे में जानकर.
मोहतरमा अनुराग मुस्कान जी बहुत ख़ुशक़िस्मत हैं कि उन्हीं दोस्त के रूप में आप मिली हो.
अनुराग जी अपनी इस प्यारी दोस्त का हमेशा ख़्याल रखना, क्योंकि आपको तो इस दुनिया में ही जन्नत (फ़िरदौस) मिल गई.
अनुराग जी! सच में आज हमें आपसे जलन हो रही है.
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