Monday, October 12, 2015

क़ुदरत और इंसान


कु़दरत किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करती... सूरज, चांद, सितारे, हवा, पानी, ज़मीन, आसमान, पेड़-पौधे मज़हब के नाम पर किसी के साथ किसी भी तरह का कोई भेदभाव नहीं करते... जब कायनात की हर शय सबको बराबर मानती है, तो फिर ये इंसान क्यों इतना नीचे गिर गया कि इसके गिरने की कोई हद ही न रही... इंसान को ख़ुदा ने अशरफ़ुल मख़लूक़ात बनाकर इस दुनिया में भेजा था... लेकिन इसने अपनी ग़र्ज़ के लिए इंसानों को मज़हबों में तक़सीम करके रख दिया... फिर ख़ुद को आला समझना शुरू कर दिया और दूसरों को कमतर मानने लगा... उनसे नफ़रत करने लगा, उनका ख़ून बहाने लगा...
ऐसे इंसानों से क्या जानवर कहीं बेहतर नहीं हैं, जो मज़हब के नाम पर किसी से नफ़रत नहीं करते, मज़हब के नाम पर किसी का ख़ून नहीं बहाते...
-फ़िरदौस ख़ान




हर तरफ़ वर्चस्व की लड़ाई है, चाहे सियासत हो या मज़हब... दहशतगर्दी की सबसे बड़ी वजह भी यही है कि दहशतगर्द दुनिया पर अपना वर्चस्व क़ायम करना चाहते हैं...
-फ़िरदौस ख़ान

1 Comments:

रचना दीक्षित said...

मज़हब के नाम पर नफरत फ़ैलाने वालों पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए. इससे सिर्फ नेताओं का भला हो सकता है. सभी को इस विषय में सोचना चाहिए.

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