लालू प्रसाद यादव ने महाराष्ट्र में एमएनएस कार्यकर्ताओं द्वारा रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने को देखते हुए राज्य में रेलों की आवाजाही रोकने की चेतावनी दी है।
Thursday, October 30, 2008
राज ठाकरे की नफ़रत की आग ने ली नौ लोगों की 'बलि'
लालू प्रसाद यादव ने महाराष्ट्र में एमएनएस कार्यकर्ताओं द्वारा रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने को देखते हुए राज्य में रेलों की आवाजाही रोकने की चेतावनी दी है।
फ़िरदौस जी, पहले जो आपने कहा था, आज पूरा देश कह रहा है...
रामजी व शिवनारायण कनाड़िया रोड स्थित शांति विहार कॉलोनी में एक ही मकान के अलग-अलग हिस्सों में रहते थे। 16 अक्टूबर को शिवनारायण को मुंबई एटीएस ने बहाने से बुलाकर पकड़ लिया तो दो-तीन दिन वह परिजन से फोन पर बात करता रहा लेकिन पुलिस द्वारा पकड़े जाने की सूचना मुंबई ले जाने से पहले दी। वहीं रामजी दशहरे के बाद से ही घर नहीं लौटा। इसका खुलासा उसी मकान में किराए से रहने वाली मंजू शर्मा ने किया था। रामजी भी पत्नी लक्ष्मी, बेटे देवव्रत, गुरू व गोविंदा से लगातार बात करता रहा। शिवनारायण के पकड़े जाने के बाद ही रामजी का परिवार व छोटे भाई की पत्नी किरण, बेटा राहुल व बेटी सोनू पड़ोसियों व किराएदारों से यह कहकर चले गए कि वे दीपावाली मनाने शाजापुर के पास गांव जा रहे हैं।
किसी को नहीं बताया गांव का पता..- रामकृष्ण व रामजी के किराएदार भी दो दिन बाद ताला लगाकर निकल गए। भास्कर ने लगभग सभी पड़ोसियों व मोहल्लेवालों से रामजी के गांव का पता पूछा तो पता चला उन्होंने सिर्फ शाजापुर में गांव होने की जानकारी दी थी।
आयोजन या गमी में ही शरीक होने जाते थे - भास्कर ने शाजापुर के चिह्न्ति गांवों की पड़ताल की तो पता चला रामजी का गांव शाजापुर से दस किमी दूर गोपीपुर है। वहां सन्नाटा पसरा था। यहां रामजी और शिवनारायण के तार मालेगांव ब्लास्ट से जुड़े होने की सूचना हर ग्रामीण को थी। वे इतने डरे थे कि किसी ने बात तक नहीं की। बमुश्किल से दिलीप पाटीदार ने बताया करीब 15 साल पहले रामजी की मां का देहांत हो गया था। उसके बाद रामजी जमीन-मकान बेचकर इंदौर में बस गया। वह या परिजन गांव में किसी की शादी या किसी गमी में ही आते थे। उनके रिश्तेदार गांव में ही हैं। वे सामने तो नहीं आए पर इतनी पुष्टि जरूर कर दी कि रामजी या उसके परिवार का कोई इंदौर में ही हो सकते हैं। एडीशनल एसपी आरसी पंवार ने भी इसे काफी हद कर सही ठहराते हुए कहा पुलिस गांव पर नजर रखे हुए है और सर्चिग कर रही है।
श्री विजयवर्गीय ने कहा साध्वी से मेरी मुलाकात सिंहस्थ के समय हुई थी। उन्होंने बंदेमातरम कल्याण समिति के नाम से बुजुर्गो की सेवा के लिए कैंप लगाया था। एक बार मैंने साध्वी को स्वामी अवधेशानंद महाराज के आश्रम में देखा। कांग्रेस नेता राहुल सिंह के निवास पर कथा में साध्वी थी और मैं वहां उनसे मिला भी था। मैं जितना उन्हें जानता हूं, उस हिसाब से कह सकता हूं कि वे हिंसक गतिविधियों में लिप्त नहीं हो सकतीं। चुनाव से पहले इसे कांग्रेस का खेल बताते हुए उन्होंने कहा ब्लास्ट की पहली जांच सीबीआई ने की थी और कहा था कि यह अमोनियम नाइट्रेट से हुआ है जबकि मुंबई पुलिस आरडीएक्स बता रही है।
आचार संहिता लगने के बाद अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट आना भी यही साबित करता है। क्यों छिपा रहे हैं सच- श्री विजयवर्गीय के बयानों ने उन संगठन प्रमुखों की परेशानी बढ़ा दी है जिन्होंने श्याम साहू और अन्य लोगों को पहचानने से इंकार कर दिया। विहिप के प्रांत प्रचार प्रसार प्रमुख मुकेश जैन, बजरंग दल के प्रदीप गौर और हिंदू जागरण मंच के प्रांत संयोजक राधेश्याम यादव यही कहते आ रहे हैं कि वे साहू सहित किसी को नहीं जानते।
Wednesday, October 22, 2008
राधा-कृष्ण के देश में प्रेम बना गुनाह
Tuesday, October 21, 2008
राज ठाकरे पागल नहीं, देशद्रोही है
Monday, October 20, 2008
महाराष्ट्र में राज ठाकरे की दहशतगर्दी जारी, मनसे पर प्रतिबंध लगे
Saturday, October 18, 2008
जब महिला ने कामांध का सिर क़लम किया
गुरुवार को फूलकुमारी पशुओं के चारे के लिए गन्ने के खेत में पत्ते तोड़ रही थी. तभी अन्नू वहां आ गया और उसके साथ ज़बर्दस्ती करने लगा. ख़ुद को बचाने के लिए महिला ने उसका बांका छें लिया और उस पर वार कर दिया... इससे युवक का सिर धड़ से अलग हो गया... बाद में महिला ने ख़ुद थाने में जाकर पुलिस को सारे मामले की जानकारी दी...
पुलिस ने फूलकुमारी की शिकायत पर मृत युवक के ख़िलाफ़ बलात्कार, हत्या के प्रयास और उत्पीड़न का मामला दर्ज कर लिया. ज़िले के पुलिस कप्तान राम भरोसे के मुताबिक़ महिला पीड़ित है और उसने अपने बचाव में ऐसा किया. इसलिए उसने कोई ज़ुर्म नहीं किया.
Thursday, October 16, 2008
''बुराई को भलाई से दूर करो'' : क़ुरान
दरअसल दहशतगर्दी को इस्लाम से जोड़ना एक सोची-समझी सांजिश है जिसकी शुरुआत पश्चिमी देशों ने की थी। आतंकवाद की निंदा करनी चाहिए, भले ही वो कोई इंसान करे, संगठन करे या फिर कोई सरकार करे, लेकिन इसे मजहब से जोड़े जाने को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। गौरतलब है कि 'इस्लाम' शब्द अरबी भाषा के 'सलाम' शब्द से निकला है, जिसका मतलब है सलामती, अमन। ऐसी हालत में आखिर किस बिनाह पर कहा जा सकता है कि इस्लाम दहशतगर्दों को पनाह देता है।
Wednesday, October 15, 2008
मुस्लिम क़ौम को अनपढ़ रखने की साज़िश
Friday, October 10, 2008
क्यों सुनाई नहीं देतीं मासूमों की चीखें
हैरत की बात यह भी है कि जिस देश में धर्म-कर्म के नाम पर इतना कहर बरपा किया जाता है...उन तथाकथित राष्ट्रवादियों को भूख से तड़पते इन मासूमों की चीखें सुनाई नहीं देतीं...क्या ऐसा नहीं हो सकता कि सभी मज़हबों के लोग मज़हब के नाम पर लड़ने-झगड़ने की बजाय आपस में मिलजुल कर मानवता की सेवा करें...
Wednesday, October 8, 2008
पाक कश्मीर की आज़ादी के खिलाफ़ नहीं
Tuesday, October 7, 2008
मासूमों को निगल रहा है कुपोषण
Monday, October 6, 2008
बाढ़ आती ही नहीं, लाई भी जाती है

बाढ़ का कारण धुस्सा बांध का टूटना है। भाखड़ा डैम और सतलुज डैम से सतलुज में पानी छोड़ा गया, जिससे हालात और ज्यादा गंभीर हो गए। सिंचाई विभाग के मुताबिक़ भांखरपुर, धर्मकोट और धालीवाल नहर में भी जरूरत से ज्यादा पानी छोड़ा गया। अधिकारियों का कहना है कि अगर रोजाना एक से डेढ़ घंटा लगातार बारिश पड़ती है तो डैम और नहरों में पानी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे भारी नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है। अफ़सोस की बात यह भी है कि सरकार के नुमाइंदे प्रशासनिक खामियों को नकारते हुए बाढ़ के लिए ग्रामीणों को ही क़सूरवार ठहराते हैं।
इसी कड़ी में, बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायज़ा लेने के लिए मोगा के गांव संघेड़ा में पहुंचे सिंचाई मंत्री सरदार जनमेजा सिंह सेखों ने लोगों से बातचीत करते हुए धुस्सी बांध टूटने का ठीकरा ग्रामीणों के ही सिर ही फोड़ दिया। इससे ग्रामीण भड़क उठे और उन्होंने बांध प्रबंधों के नाम पर हुई घपलेबाजी की पोल खोलनी शुरू कर दी। अब भड़कने की बारी सिंचाई मंत्री की थी। मामले की नजाकत को भांपते हुए डिप्टी कमिश्नर वीके मीणा और एसडीएम लखमीर सिंह ने दोनों पक्षों को शांत कराया। ग्रामीणों का कहना है कि 1993 के बाद प्रशासन ने बांध पर मिट्टी डलवाने तक की कोशिश नहीं की। गांव के लोग हर साल ख़ुद ही मिट्टी डालते रहे हैं और सिंचाई विभाग फर्जी बिल बनाकर पैसा हड़प करता रहा है। उनका यह भी कहना है कि हर साल बांध पर थोड़ी-थोड़ी मिट्टी भी डलवाई होती तो इतनी तबाही नहीं हुई होती। उनका कहना है कि अधिकारियों और राजनेताओं ने अपने निजी स्वार्थ के लिए हजारों लोगों को बर्बाद कर दिया।
गौरतलब है कि सतलुज में आई बाढ़ से हुई तबाही ने प्रशासनिक प्रबंधों की कलई खोलकर रख दी है। मोगा के गांव बोगेवाल के समीप जिस स्थान पर धुस्सी बांध टूटा है, वहां 1997 में तकनीकी रूप से गलत ढंग से नोज तैयार की गई थी, जिससे बांध में दरारें पड़ गईं। धुस्सी बांध के किनारों पर लगाए गए बबूल के पेड़ों के कटान के चलते भी बांध सुरक्षा संबंधी सवालों के घेरे में था। हर साल मानसून शुरू होने से पहले धुस्सी बांध का जायजा लेने वाले अधिकारियों ने नोज की तकनीकी कमी और पेड़ों के कटान के कारण कमज़ोर होते बांध की तरफ़ ध्यान नहीं दिया। नोज निर्माण में लापरवाही स्वीकार करते हुए सिंचाई मंत्री सरदार जनमेजा सिंह सेखों ने कहा कि मामले की जांच सिंचाई विभाग के मुख्य इंजीनियर को सौंपी गई है।
सिंचाई मंत्री के मुताबिक़ राज्य के 134 गांवों में बाढ़ आई है, जिससे 55 हज़ार प्रभावित हुए हैं। इन गांवों में क़रीब 11080 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फ़सलें भी पूरी तरह तबाह हो गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि प्रभावित किसानों के नुक़सान की भरपाई की जाए, क्योंकि केंद्रीय पूल दिए जाने वाले अनाज में पंजाब के किसानों की हिस्सेदारी 60 से 70 फ़ीसदी रहती है। साथ ही उन्होंने किसानों के क़र्ज़ भी माफ़ किए जाने की मांग की। गौरतलब है कि बांग्लादेश के बाद भारत ही दुनिया का दूसरा सर्वाधिक बाढ़ग्रस्त देश है। 1960 से 1980 के बीच दुनिया में बाढ से जो लोग मरे उनमें से 20 फ़ीसदी भारत से ही थे। विडंबना यह भी है कि पिछले क़रीब छह दशकों में बाढ़ से होने वाले नुक़सान में 50 से 90 गुना बढ़ोतरी हुई है। एक अनुमान के मुताबिक़ 1953 में जहां कुल नुक़सान क़रीब 50 करोड़ रुपए था, वहीं 1984 में यह 2500 करोड़, 1985 में 4100 करोड़ और 1988 में 4600 करोड़ रुपए हो गया। 1990 के शुरू में कम नुक़सान हुआ। 1997 में 800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था, लेकिन 1999 और 2000 में बाढ़ से ज़्यादा तबाही हुई। हर साल बाढ़ से होने वाले जान व माल के नुक़सान में बढ़ोतरी ही हो रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
देश में कुल 62 प्रमुख नदी प्रणालियां हैं, जिनमें से 18 ऐसी हैं जो अमूमन बाढ़ग्रस्त रहती हैं। उत्तर-पूर्व में असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश तथा दक्षिण में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु बाढ़ग्रस्त इलाके माने जाते हैं। लेकिन कभी-कभार देश के अन्य राज्य भी बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। 1996 में हरियाणा में बाढ़ ने कहर बरपाया था।
पिछले करीब छह दशकों में देश में 256 बड़े बांध बनाए गए हैं और 154 निर्माणाधीन हैं। साथ ही पिछले करीब दो दशकों से बाढ़ नियंत्रण में मदद के लिए रिमोट सेंसिंग और भौगोलिक सूचना व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन संतोषजनक नतीजे सामने नहीं आ पा रहे हैं।
गौरतलब है कि विकसित देशों में आगजनी, तूफान, भूकंप और बाढ़ के लिए कस्बों का प्रशासन भी पहले से तैयार रहता है। उन्हें पहले से पता होता है कि किस पैमाने पर, किस आपदा की दशा में, उन्हें क्या-क्या करना है। वे बिना विपदा के छोटे पैमाने पर इसका अभ्यास करते रहते हैं। इसमें आम शहरियों के मुखियाओं को भी शामिल किया जाता है। गली-मोहल्ले के हर घर तक यह सूचना मीडिया या डाक के जरिये संक्षेप में पहुंचा दी जाती है कि किस दशा में उन्हें क्या करना है। संचार व्यवस्था के टूटने पर भी वे प्रशासन से क्या उम्मीद रख सकते हैं। पहले तो वे इसकी रोकथाम की कोशिश करते हैं। इसमें विशेषज्ञों की सलाह ली जाती है। इस प्रक्रिया को आपदा प्रबंधन कहते हैं। आग तूफान और भूकंप के दौरान आपदा प्रबंधन एक खर्चीली प्रक्रिया है, लेकिन बाढ़ का आपदा नियंत्रण उतना खर्चीला काम नहीं है। इसे बखूबी बाढ़ आने वाले इलाकों में लागू किया जा सकता है।
विकसित देशों में बाढ़ के आपदा प्रबंधन में सबसे पहले यह ध्यान रखा जाता है कि मिट्टी, कचरे वगैरह के जमा होने से इसकी गहराई कम न हो जाए। इसके लिए नदी के किनारों पर खासतौर से पेड़ लगाए जाते हैं, जिनकी जड़ें मिट्टी को थामकर रखती हैं। नदी किनारे पर घर बसाने वालों के बगीचों में भी अनिवार्य रूप से पेड़ लगवाए जाते हैं। जहां बाढ़ का खतरा ज्यादा हो, वहां नदी को और अधिक गहरा कर दिया जाता है। गांवों तक में पानी का स्तर नापने के लिए स्केल बनी होती है।
भारत में भी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए पहले से ही तैयार रहना होगा। इसके लिए जहां प्रशासन को चाक-चौबंद रहने की ज़रूरत है, वहीं जनमानस को भी प्राकृतिक आपदा से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। स्कूल, कॉलेजों के अलावा जगह-जगह शिविर लगाकर लोगों को यह प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद ली जा सकती है। इस तरह प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुक़सान को कम किया जा सकता है।
(सोपानStep के नए अंक में प्रकाशित)
मेरे लफ़्ज़ ही मेरी पहचान हैं
इश्क़ का दरिया अज़ल से अबद तक गुज़रा, मगर ऐसा कोई न मिला जो उसका एक घूंट भी पीता. आख़िर इश्क़ विसाले-हक़ हुआ.......हज़रत राबिया बसरी
हिन्दुस्तान का शहज़ादा
हमारे बारे में
- फ़िरदौस ख़ान
- पत्रकार, शायरा और कहानीकार... उर्दू, हिन्दी और पंजाबी में लेखन. उर्दू, हिन्दी, पंजाबी, गुजराती, इंग्लिश और अरबी भाषा का ज्ञान... दूरदर्शन केन्द्र और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हरिभूमि में कई वर्षों तक सेवाएं दीं...अनेक साप्ताहिक समाचार-पत्रों का सम्पादन भी किया... ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन केन्द्र से समय-समय पर कार्यक्रमों का प्रसारण... ऑल इंडिया रेडियो और न्यूज़ चैनल के लिए एंकरिंग भी की है. दैनिक हिन्दुस्तान, नवभारत टाइम्स, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण ट्रिब्यून, जनसत्ता, राजस्थान पत्रिका, नवभारत, अजीत समाचार, देशबंधु और लोकमत सहित देश-विदेश के विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और समाचार व फीचर्स एजेंसी के लिए लेखन... मेरी ' गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत' नामक एक किताब प्रकाशित... इसके अलावा डिस्कवरी चैनल सहित अन्य टेलीविज़न चैनलों के लिए स्क्रिप्ट लेखन जारी... उत्कृष्ट पत्रकारिता, कुशल संपादन और लेखन के लिए अनेक पुरस्कारों ने नवाज़ा जा चुका है...इसके अलावा कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी शिरकत...कई बरसों तक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली... उर्दू, पंजाबी, अंग्रेज़ी और रशियन अदब (साहित्य) में ख़ास दिलचस्पी. फ़िलहाल 'स्टार न्यूज़ एजेंसी' और 'स्टार वेब मीडिया' में समूह संपादक का दायित्व संभाल रही हूं...
हमारे ब्लॉग
-
लुप्त होती ग्रामीण संस्कृति... - *फ़िरदौस ख़ान* आदि अदृश्य नदी सरस्वती के तट पर बसे हरित प्रदेश हरियाणा अकसर जाना होता है. बदलाव की बयार ऐसी चली है कि हर बार कुछ न कुछ नया दिखाई पड़ता है....5 weeks ago
-
Autumn - Sometimes the autumn fascinates while our walking gently on the dry out brown leaves in the garden and on the land covered by the brown leav...1 year ago
-
-
शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैन - शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैन दीन अस्त हुसैन, दीने-पनाह हुसैन सरदाद न दाद दस्त, दर दस्ते-यज़ीद हक़्क़ा के बिना, लाइलाह अस्त हुसैन *-हज़रत ख़्वाजा मोईनुद...3 years ago
उन्वान
ज़खीरा
-फ़िरदौस ख़ान



