ऐ इत्मीनान पाने वाली जान
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मौत जब भी आए, तो अपनों के बीच चहारदीवारी में आए. और रूह क़ब्ज़ करने वाला
फ़रिश्ता ये पैग़ाम लेकर आए-
ऐ इत्मीनान पाने वाली जान !
तू अपने परवरदिगार की तरफ़ इस ...
1 week ago







4 Comments:
congratulations.
http://www.ashokvichar.blogspot.com
गंगा किसकी और जमना किसकी? कम से कम धाराओं को तो मत बाँटों.
किताब के लिए बधाई. थोड़ा अंश भी लिखते तो अच्छा रहता.
नयी किताब बहुत बहुत मुबारक हो।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
अशेष शुभकामनाएं। सेकुलरिस्टों द्वारा हिंदू-मुस्लिम मजहब के बीच पैदा की गईं दरार को पाटने में यह पुस्तक मददगार हो, यही कामना है।
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